मेरी साँस-साँस गाए हरे कृष्ण हरे राम!
रटती जाए पल-पल, हरे कृष्ण हरे राम!
जब ज्ञान की ज्योति जली, अँधियारा दूर हटा।
बस नाम ही नाम दिखा, हरे कृष्ण हरे राम!
मोह-लोभ के दल-दल में, मैं रहा दुखी अशान्त।
सुख शांति का सागर है, हरे कृष्ण हरे राम!
भव बंधन फंद कटा, आवागमन चक्र कटा।
रे मुक्ति की कुंजी है, हरे कृष्ण हरे राम!
तीर्थों का भ्रमण किया, ग्रंथों का मनन किया।
एक सार यही निकला, हरे कृष्ण हरे राम!
अनुभव यह रिषियों का, देवों का मुनियों का।
गुरुमंत्र महान है ये, हरे कृष्ण हरे राम!
कोई जपे बैठकर माला, कोई नाम का ध्यान धरे,
‘प्रभाकर’ भजन करे, हरे कृष्ण हरे राम!

