ओ बाबा शीश के दानी, तेरी शक्ति सबने मानी
:: दोहा ::
ओ बाबा शीश के दानी, तेरी शक्ति सबने मानी।
प्यासी आँखों में भर दे सूरत तेरी मस्तानी॥
:: स्थाई ::
श्याम तेरे भक्तों को, तेरा ही सहारा है,
जब-जब भीड़ पड़ी, तुमको ही पुकारा है।
अपना जिन्हें समझा, वो तो पराए थे,
दुनिया की क्या कहिये, अपनों ने मारा है।
मतलब पूरा किया और फिर दूर हुए,
ऐसे नातेदारों से नाता हमारा है।
किसके दर जाउँ मैं, मुझको अपना ले जो,
दर सारे झूठे हैं, सच्चा तेरा द्वारा है।
कहते हैं दयालु तू, दया दिखला अपनी,
तूने भव सिन्धु से, पापियों को भी तारा है।
तू ही तन, मन, धन है, तू ही मेरा जीवन है,
तेरे बिन अपना नहीं, कहीं भी गुजारा है।
प्यार तेरा चाहूँ मैं, अपनी तमन्ना है,
श्यामसुन्दर’ हमने सुना, भक्तों को प्यारा है।
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January 25th, 2009 at 10:31 am
yah bhajan bahut hi payara hai.
main shyam baba se yahi urdas lagana chata hu ki main bhi baba ke bhajan gao………