
बाबा बैजनाथ की महिमा पर आधरित फिल्म भोला देवघिरया का सावन मेला के अवसर पर सर्वत्र उपलब्ध हो गई है। इस फिल्म में मुख्य अभिनेत्री की भूमिका में हैं- गृहणी से भजन गायिका बनी श्रीमती माया श्रवण। श्रीमती माया श्रवण ने अपनी निजी जीवन को ‘भोला देवघरिया’ नामक इस फिल्म में एक्टिंग के माध्यम से साकार किया है। प्रस्तुत है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :
प्रश्न : आपने पहलीबार किसी फिल्म में काम किया है। कैसा लग रहा है?
माया श्रवण : जब किसी कलाकार को पहलीबार किसी मंच पर, कैसेट में या फिल्म में गाने पर जो आनन्द मिलता है वैसा ही कुछ अनुभव मुझे भी हुआ है। फिल्म ‘भोला देवघरिया’ मेरे जीवन की एक महत्वपूर्ण एवं यादगार घटना बन गई है, जिसके बारे में पहले मैंने कल्पना भी नहीं की थी।
प्रश्न : फिल्म ‘भोला देवघरिया’ में आपकी भूमिका क्या है?
माया श्रवण : फिल्म ‘भोला देवघरिया’ में मैंने अपने निजी जीवन के एक भाग का ही अभिनय करने का प्रयास किया है। मैं संगीत सीखना चाहती थी, मुझे श्री संजय प्रभाकर के रूप में संगीत गुरुजी मिले और उन्होंने मेरी प्रतिभा को तराशकर मुझे विभिन्न मंचों तथा अब फिल्म में भी पार्श्वगायन और अभिनय करने का अवसर दिलाया, इन्हीं सभी सच्ची बातों को अभिनय द्वारा मैंने फिल्म ‘भोला देवघरिया’ में प्रस्तुत किया है।
प्रश्न : फिल्म भोला देवघरिया में अभिनय एवं गायन का श्रेय आप किसको देंगे?
माया श्रवण : गुरु गोविन्द दाए खड़े काको लागूँ पाँव, बलिहारी गुरु आपकी जो गोविन्द दिया बताय। न तो मैं संगीत जानती थी और ना अभिनय। हाँ एक सफल व्यवसायी परिवार की बहू के रूप में मेरे पास सभी साधन थे, फिर भी मैं अपने समय का सदुपयोग करना चाहती थी। सो मैंने 7 साल पहले संगीत सीखने का मन बनाया। मेरे धर्मपति श्री श्रवण कुमार अग्रवाल ने मेरी इस सोच को पूरा करने में मेरी भरपूर मदद करी। उन्होंने मेरे गुरुजी संजय प्रभाकर को ढूँढ़ा और मुझे संगीत की शिक्षा दिलवाई। गुरुजी संजय प्रभाकर ने मुझे संगीत की बारीकियाँ सिखलाईं और फिर मुझे एक भजन गायिका के रूप में प्रसिद्धि भी दिलवाई। गुरुजी संजय प्रभाकर ने ही मुझमें गायिका और नायिका के गुण उत्पन्न किए। उन्होंने बताया कि यह जीवन ही एक नाटक है, हम सभी प्रतिदिन अभिनय करते हैं। जब गुरुजी ने अपने जीवन पर आधारित फिल्म भोला देवघरिया का निमार्ण किया तो उसमें मुझे भी अभिनय करने का अवसर दिया। मैंने देवघर का नाम तो सुना था, पर कभी देवघर के बाबा वैद्यनाथजी के बारे में इतना विस्तार से नहीं जानती थी और ना ही वहाँ कभी गई थी। गुरुजी संजय प्रभाकर ने गायन और अभिनय के माधयम से मुझे बाबा बैजनाथ से मिलवा दिया। मैं तो जैसे धन्य हो गई।
प्रश्न : आप एक गृहणी हैं, आपने एक साथ दो दो भूमिकाएँ कैसे निभाईं?
माया श्रवण : मेरे पति ने इसमें मेरा सबसे अधिक सहयोग दिया। वस्तुत: वह चाहते हैं कि मैं समाज सेवा के ऐसे कार्य करूँ। मेरा एक बेटा साकेत आस्ट्रेलिया में पढ़ता है, जबकि दूसरा साहिल दिल्ली में। मेरे बेटे साहिल ने भी फिल्म ‘भोला देवघरिया’ में भगवान श्री विष्णु एवं ग्वाले बैजु का अभिनय किया है। हमने फिल्म में काम करने को अपने एक शोक की तरह से लिया और अपने व्यस्त समय में से कुछ समय निकाल कर इसकी शूटिंग, और डबिंग की। 10 दिनों में शूटिंग पूरी हुई जबकि चार दिनों तक डबिंग के लिए जाना पड़ा, आपसी तालमेल से मैंने एक साथ दो-दो भूमिकाएँ कर ही ली।
प्रश्न : क्या आगे भी आप फिल्मों में काम करना चाहेंगी?
माया श्रवण : देखिये मैं कोई प्रोफेशनल कलाकार तो हूँ नहीं। परन्तु ऐसे सकारात्मक कार्यों में स्वयं को व्यस्त रखना मेरा और मेरे पूरे परिवार का शौक है। इस शौक को पूरा करने का कार्य गुरुजी संजय प्रभाकर ने किया है। गुरुजी आगे किसी फिल्म या ऐलबम का निर्माण करेंगे और मुझे उसमें काम करने योग्य समझेंगे तो मैं अपना समय अवश्य डिवोट करूँगी।
प्रश्न : आपने फिल्म ‘भोला देवघरिया’ में अभिनय व गायन करने का निर्णय कैसे लिया?
माया श्रवण :


