
November 15th, 2010 admin Posted in Audio Video | No Comments »

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August 29th, 2009 admin Posted in फिल्म समीक्षा | No Comments »

बाबा बैजनाथ की महिमा पर आधरित फिल्म भोला देवघिरया का सावन मेला के अवसर पर सर्वत्र उपलब्ध हो गई है। इस फिल्म में मुख्य अभिनेत्री की भूमिका में हैं- गृहणी से भजन गायिका बनी श्रीमती माया श्रवण। श्रीमती माया श्रवण ने अपनी निजी जीवन को ‘भोला देवघरिया’ नामक इस फिल्म में एक्टिंग के माध्यम से साकार किया है। प्रस्तुत है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :
प्रश्न : आपने पहलीबार किसी फिल्म में काम किया है। कैसा लग रहा है?
माया श्रवण : जब किसी कलाकार को पहलीबार किसी मंच पर, कैसेट में या फिल्म में गाने पर जो आनन्द मिलता है वैसा ही कुछ अनुभव मुझे भी हुआ है। फिल्म ‘भोला देवघरिया’ मेरे जीवन की एक महत्वपूर्ण एवं यादगार घटना बन गई है, जिसके बारे में पहले मैंने कल्पना भी नहीं की थी।
प्रश्न : फिल्म ‘भोला देवघरिया’ में आपकी भूमिका क्या है?
माया श्रवण : फिल्म ‘भोला देवघरिया’ में मैंने अपने निजी जीवन के एक भाग का ही अभिनय करने का प्रयास किया है। मैं संगीत सीखना चाहती थी, मुझे श्री संजय प्रभाकर के रूप में संगीत गुरुजी मिले और उन्होंने मेरी प्रतिभा को तराशकर मुझे विभिन्न मंचों तथा अब फिल्म में भी पार्श्वगायन और अभिनय करने का अवसर दिलाया, इन्हीं सभी सच्ची बातों को अभिनय द्वारा मैंने फिल्म ‘भोला देवघरिया’ में प्रस्तुत किया है।
प्रश्न : फिल्म भोला देवघरिया में अभिनय एवं गायन का श्रेय आप किसको देंगे?
माया श्रवण : गुरु गोविन्द दाए खड़े काको लागूँ पाँव, बलिहारी गुरु आपकी जो गोविन्द दिया बताय। न तो मैं संगीत जानती थी और ना अभिनय। हाँ एक सफल व्यवसायी परिवार की बहू के रूप में मेरे पास सभी साधन थे, फिर भी मैं अपने समय का सदुपयोग करना चाहती थी। सो मैंने 7 साल पहले संगीत सीखने का मन बनाया। मेरे धर्मपति श्री श्रवण कुमार अग्रवाल ने मेरी इस सोच को पूरा करने में मेरी भरपूर मदद करी। उन्होंने मेरे गुरुजी संजय प्रभाकर को ढूँढ़ा और मुझे संगीत की शिक्षा दिलवाई। गुरुजी संजय प्रभाकर ने मुझे संगीत की बारीकियाँ सिखलाईं और फिर मुझे एक भजन गायिका के रूप में प्रसिद्धि भी दिलवाई। गुरुजी संजय प्रभाकर ने ही मुझमें गायिका और नायिका के गुण उत्पन्न किए। उन्होंने बताया कि यह जीवन ही एक नाटक है, हम सभी प्रतिदिन अभिनय करते हैं। जब गुरुजी ने अपने जीवन पर आधारित फिल्म भोला देवघरिया का निमार्ण किया तो उसमें मुझे भी अभिनय करने का अवसर दिया। मैंने देवघर का नाम तो सुना था, पर कभी देवघर के बाबा वैद्यनाथजी के बारे में इतना विस्तार से नहीं जानती थी और ना ही वहाँ कभी गई थी। गुरुजी संजय प्रभाकर ने गायन और अभिनय के माधयम से मुझे बाबा बैजनाथ से मिलवा दिया। मैं तो जैसे धन्य हो गई।
प्रश्न : आप एक गृहणी हैं, आपने एक साथ दो दो भूमिकाएँ कैसे निभाईं?
माया श्रवण : मेरे पति ने इसमें मेरा सबसे अधिक सहयोग दिया। वस्तुत: वह चाहते हैं कि मैं समाज सेवा के ऐसे कार्य करूँ। मेरा एक बेटा साकेत आस्ट्रेलिया में पढ़ता है, जबकि दूसरा साहिल दिल्ली में। मेरे बेटे साहिल ने भी फिल्म ‘भोला देवघरिया’ में भगवान श्री विष्णु एवं ग्वाले बैजु का अभिनय किया है। हमने फिल्म में काम करने को अपने एक शोक की तरह से लिया और अपने व्यस्त समय में से कुछ समय निकाल कर इसकी शूटिंग, और डबिंग की। 10 दिनों में शूटिंग पूरी हुई जबकि चार दिनों तक डबिंग के लिए जाना पड़ा, आपसी तालमेल से मैंने एक साथ दो-दो भूमिकाएँ कर ही ली।
प्रश्न : क्या आगे भी आप फिल्मों में काम करना चाहेंगी?
माया श्रवण : देखिये मैं कोई प्रोफेशनल कलाकार तो हूँ नहीं। परन्तु ऐसे सकारात्मक कार्यों में स्वयं को व्यस्त रखना मेरा और मेरे पूरे परिवार का शौक है। इस शौक को पूरा करने का कार्य गुरुजी संजय प्रभाकर ने किया है। गुरुजी आगे किसी फिल्म या ऐलबम का निर्माण करेंगे और मुझे उसमें काम करने योग्य समझेंगे तो मैं अपना समय अवश्य डिवोट करूँगी।
प्रश्न : आपने फिल्म ‘भोला देवघरिया’ में अभिनय व गायन करने का निर्णय कैसे लिया?
माया श्रवण :
August 29th, 2009 admin Posted in फिल्म समीक्षा | No Comments »

देवघर : आज से ठीक 21 वर्ष पूर्व 1989 ई. में देवघर के संजय प्रभाकर ने भोलेनाथजी के भजनों की पहली आडियो कैसेट ‘चलो भाग चलें देवघर की ओर’ का निर्माण किया था। इस कैसेट में भजन गायन के बाद संजय प्रभाकर ने देवघर का वह प्रथम भजन गायक बनने का गौरव पाया था, जिसकी कैसेट उस साल सावन मेले में सुपरहीट रही। 1990 ई. में संजय प्रभाकर के स्वर में ‘शिवगंगा’ नामक शिव भजनों की कैसेट मैक्स कम्पनी (दिल्ली) द्वारा जारी की गई। इस कैसेट ने भी सफलता के कीर्तिमान बनाये। परन्तु इसके बाद संजय प्रभाकर धीरे-धीरे सावन मेला के बाजार से अलग होते गए।21 साल बाद संजय प्रभाकर ने शिवजी की प्रेरणा से एकबार फिर से देवघर के श्रावणी मेला के भक्ति संगीत बाजार में कदम रखा है। 2009 के सावन मेला के अवसर पर संजय प्रभाकर एक वीडियो फिल्म ‘भोला देवघरिया’ के माध्यम से प्रस्तुत हो रहे हैं। सवा दो घंटे की इस फिल्म का मुख्य आकर्षण न केवल इसके एक दर्जन भजन हैं अपितु इसकी कहानी भी तीन ऐसे भजन गायकों की एक सच्ची कहानी है जो भोलेनाथ जी की कृपा से सफल भजन गायक बन जाते हैं। ये तीनों गायक है स्वयं संजय प्रभाकर, सकल बलमुवाँ एवं माया श्रवण। वीडियो फिल्म देवघरिया में कुल एक दर्जन भजन हैं। इसके सभी भजनों को संजय प्रभाकर, सकल बलमुवाँ एवं माया श्रवण ने अपना स्वर दिया है। फिल्म के भजनों को संजय प्रभाकर, सकल बलमुवाँ एवं प्रदीप अनजाना ने अपनी लेखनी दी है। इसका संगीत संजय प्रभाकर ने तैयार किया है। फिल्म की कथा, पटकथा एवं निदेर्शन का कार्य भी संजय प्रभाकर ने ही किया है। फिल्म ‘भोला देवघरिया’ प्रत्येक शिव भक्त एवं संगीत प्रेमी के लिए लेना और देखना आवश्यक है। फिल्म भोला देवघरिया अनेक गायकों के लिए फिल्म बनाने हेतु कहानी का प्लाट है। इसमें कोई दो मत नहीं है कि 2020 के सावन मेला पर कुछ अन्य भजन गायक भी इस फिल्म से प्रेरित होकर अपने जीवन की घटनाओं पर फिल्म का निर्माण करें।
August 29th, 2009 admin Posted in कैसेट समीक्षा | No Comments »
श्री श्याम बाबा की विभिन्न आरतियों को गाया है श्री पप्पू शर्मा ने। प्रात: कालीन आरती से लेकर शयन आरतियों को बेहतरीन संगीत के साथ अब सुनना सम्भव हो गया है। यह आरती संग्रह प्रत्येक श्याम प्रेमी के घर में अवश्य होनी चाहिये। श्री पप्पू शर्मा के स्वर में ‘श्याम खजाना खोल रहा’ श्याम भजनों का अद्वितीय संग्रह है। 2009 के फाल्गुन मेले पर यह सुपरहीट ऐलबम रही। जिन्होंने इस ऐलबम को अब तक नहीं सुना है या लिया है, उनके लिए सूरत में एक सुनहरा अवसर है कि वह ‘जाट के ठाठ’ फिल्म के प्रदर्शन के दौरान इसे प्राप्त कर सकते हैं। इन सभी भजनों और श्याम बाबा की आरतियों को भक्त अपने मोबाईल की कॉलर टयून भी बना सकते हैं।
August 29th, 2009 admin Posted in कैसेट समीक्षा | No Comments »
1998 ई. बैजनाथधाम देवघर निवासी संजय प्रभाकर ने महादेव बैद्यनाथ की सबसे पहली ऑडियो कैसेट का निर्माण एवं भजन लेखन एवं गायन किया था। इसके पहले पटना के मुन्ना सिंह के भोजपुरी शिव भजन एवं लखबीर सिंह लक्खा की गाई ‘पगली’ 1988 ई. में छिटपुट काँवड़ियों के लिए उपलब्ध् थी। 88 में देवघर में सावन मेले के अवसर पर टावर चौक स्थित भारती पुस्तक भंडार के चबूतरे पर संजय प्रभाकर एवं उनके भाईयों ने मिलकर ऑडियो कैसेट की दुकान खोली थी। 88 के पूर्व संजय प्रभाकर देवघर के दर्शनिया में अगरबत्ती एवं अन्य पूजन सामग्रियों की दुकान श्रावणी मेले पर लगाया करते थे। इसके बाद इस परिवार ने दर्शनिया में लाखों काँवड़ियों की सहायतार्थ ‘खोया-पाया सूचना केन्द्र’ चलाया था। एक साल तो दर्शनिया में ही एक होटल भी चलाया गया जिसमें मारवाड़ी ‘कढ़ी’ ने काँवड़ियों को अपनी ओर आकर्षित किया था। इस प्रकार संजय प्रभाकर एवं उनके परिवार ने देवघर को श्रावणी मेला के अवसर पर स्थानीय लोगों के लिए व्यापार के नवीन अवसरों को प्रस्तुत किया। आज भी सभी देवघर वासी इस बात को सहर्ष स्वीकार करते हैं कि यदि संजय प्रभाकर ने पहली कैसेट नहीं बनाई होती तो आने वाले 5-10 वर्षों तक यह व्यवसाय देवघर के बाहर वालों तक ही सीमित रहता। ‘चलो भाग चलें देवघर की ओर’ ने स्थानीय भजन गायकों, भक्त कवियों और संगीतज्ञों के लिए अपनी प्रतिभा को लाखों लोगों तक पहुँचाने का सुगम रास्ता प्रदान किया। इसमें कोई दो मत नहीं है कि 20 वर्ष के बाद देवघर का संगीत बाजार अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँच गया है। कैसेट उद्योग के बाद देवघर को श्रावणी संगीत बाजार अब वीडियो ऐलबम उद्योग की ओर उन्मुख हो चुका है। देवघर के लगभग सभी कलाकारों, वीडियो निर्माताओं का मानना है कि वह सभी बाबा के आशीर्वाद एवं संजय प्रभाकर की प्रेरणा से ही लगातार सफल होते जा रहे हैं। यही कारण है कि देवघर में प्रतिवर्ष 2-4 स्थानीय भजन गायक भजन गायन के क्षेत्रा में अपना भाग्य आजमाने हेतु एक बड़ा मंच और बाजार प्राप्त कर रहे हैं। संजय प्रभाकर इस फलते-फूलते भक्ति संगीत के बाजार को देखकर इसे केवल महादेव बाबा बैजनाथ की असीम कृपा मानते हैं।’चलो भाग चलें देवघर की ओर’ की रिकॉर्डिंग कोलकाता में की गई थी। इसमें कुल 10 भजन थे। सभी भजनों को संजय प्रभाकर ने लेखनी दी थी। भजनों के बोल इस प्रकार हैं- काँवड़ लेकर चल पड़े (तेरे दर को छोड़ चले), जाना है जाना है मुझे जाना है (होँ बोलो कौन है वो) भजले मनवा भोले को (क्या करते थे साजना), शिव का नाम लिया (तेरा नाम लिया), भोले भूल न जाना (मितवा भूल न जाना), सत्यम शिव सुन्दरम (गंगा जमुना सरस्वती), एक दो तीन (राम लखन), अब भटकने से क्या फायदा, चलो-चलो ऐ भक्तों (हवा-हवा) एवं चलो भाग चलें देवघर की ओर (चलो भाग चलें पूरब की ओर)।उस जमाने में यह देवघर के एक भजन गायक की पहली कैसेट बनी जिसकी कम से कम पाँच पायरेसी आई थी। बाजार में देर से उपलब्ध्ता के कारण दो-दो सौ रुपये में यह ब्लैक भी हुई। नरसिंह टाकीज के पास एक दुकानदार ने इसे तीन सौ रुपये में बेचा था, जबकि इसका अधिकतम मूल्य मात्रा 18 रुपये था। 1989 ई. में जब यह कैसेट आई तो स्थानीय युवकों के लिए रोजगार के अवसर भी लेकर आई। सैकड़ों युवकों ने अपने-अपने घरों के चबूतरों पर कैसेट की दुकाने खोलीं और जमकर कमाई भी की। यह इसी का सुपरिणाम है कि आज देवघर में श्रावणी मेला पर एक हजार से भी अधिक दुकानें केवल भजनों की कैसेटों और सीडी की होती है। 1990 ई. में संजय प्रभाकर के स्वर में ‘शिवगंगा’ की सफलता ने टी सीरीज जैसी कम्पनी को अगले वर्ष श्रावणी मेला पर शिव भजनों की कैसेट बनाने के लिए प्रेरित किया। उत्तार भारत के रामअवतार शर्मा एवं नरेन्द्र चंचल ने शिवगंगा की सफलता के बाद ही काँवड़ भजन गायन का श्रीगणेश किया।
June 21st, 2008 admin Posted in कैसेट समीक्षा | No Comments »
हिसार में महाराजा अग्रसेनजी का अग्रोहाधाम है। इस अग्रोहाधाम में महालक्ष्मी का एक भव्य मंदिर है। जी म्यूजिक कम्पनी ने यहाँ के श्रीलक्ष्मी मंदिर हेतु अग्रोहा वाली महालक्ष्मी नामक ऑडियो ऐलबम जारी किया है। ‘अग्रोहा वाली महालक्ष्मी’ ऐलबम के सभी भजनों में अग्रोहा की महालक्ष्मी की महिमा का वर्णन है। अग्रोहा वाली महालक्ष्मी भजनों की ऐलबम को पार्श्व गायक श्री सुरेश वाडेकर, श्री रफीक सागर, श्री संजय प्रभाकर, श्री अरविन्दर सिंह, श्रीमती मंजू भाटिया ने अपना स्वर दिया है। भजनों के बोल है महालक्ष्मी जय महालक्ष्मी, हृदय विराजो महालक्ष्मी, जगत प्रकाशिनी, चलो महालक्ष्मी के द्वारे’, बड़ा अनोखा चमत्कार है, झिलमिल झिलमिल दीप जले हैं, बिगड़ी बात बनाने वाला महालक्ष्मी का द्वारा, एवं आए माँ तेरे चरणों में’ अत्यंत ही भावपूर्ण हैं। इस ऐलबम का कर्णप्रिय संगीत तैयार किया है मुम्बई के प्रख्यात संगीतकार श्री दत्ता कोली ने। ऐलबम के संयोजन में मुख्य भूमिका निभाई श्री ओमजी ने। अग्रोहाधाम पधरने वाले भक्तों के लिए यह ऐलबम श्री महालक्ष्मी की वन्दना एवं स्तुति करने का महामंत्र है।
April 3rd, 2008 admin Posted in Audio Video | 1 Comment »