प्रस्तुति : श्रीमती रेणू शर्मा, रश्मि शर्मा एवं खुश्बू शर्मा, जयपुर
लेहसुवा इन्हीं दिनों बाजार में मिलता है। लेहसुवा विशेषकर राजस्थान में पाया जाता है। मारवाड़ी, लेहसुवा नामक इस फल से अचार बनाते हैं। आईये जानते हैं कि लेहसुवा का अचार कैसे बनाया जाता है?
-1 किलो लेहसुवा
-५० ग्राम सौंफ
-सरसों तेल उतना जितने में लेहसुवा डूबा रहे
-स्वादानुसार नमक, हल्दी, हींग, मेथी, काली जीरी मंगरेकला
-कच्चा आम कैरी २५० ग्राम -कद्दू कश करलें या बारीक काट लें।
विधि : सबसे पहले मेथी और सौंफ को दरदरा पीस लें। एक टोपिए में पानी लेकर उबालें। उकाली आ जाने पर डंटी और टोपी समेत लेहसुवा उबलते हुए पानी में डाल दें। १० मिनट तक लेहसुवा को खौलने दें। एक लेहसुवा निकालकर देखें कि उसमें नाखुन या चक्कू की नोक असानी से घुस रही है क्या? यदि हाँ तो तत्काल गैस बन्द कर दें। टोपिए को चालनी में उलट दें जिससे उसका पानी झड़ जाए। इसके बाद एक कपड़े के उपर लेहसुवा पानी सूखने के लिए रखें। पंखे की हवा में दस-पाँच मिनट तक पानी में सूख जाए तब उसकी टोपी उतार दें। अब लेहसुवा को एक चौड़े मुँह के बर्त्तन में रखें। एकत्र मसाला एवं सरसों का तेल डालकर हल्के हाथों से मिलाएँ। अच्छी तरह मिल जाने और तेल में लेहसुवा के डूबे रहने जैसी स्थिति बन जाने पर उसे धूप में रख दें। २-४ दिन के बाद लेहसुवा के अचार का भोग लगाके खाएँ।

