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Saturday, September 12th, 2009 Posted in Uncategorized | No Comments »
सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधना हस्तपद्माभ्यां कूष्मांडा शुभदास्तु मे॥ परिचय : माता दुर्गा का चौथे स्वरूप का नाम माँ कूष्मांडा है। संस्कृत में कूष्माण्ड 'कुम्हड़े' को कहा जाता है। माता को ... Read more..Saturday, September 12th, 2009 Posted in Uncategorized | No Comments »
पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्राकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥ परिचय : माँ दुर्गा की तीसरी शक्ति 'चन्द्रघंटा' है। नवरात्रिा के तीसरे दिन माँ दुर्गा के इसी स्वरूप की अर्चना करनी चाहिये। माता के ... Read more..Saturday, September 12th, 2009 Posted in Uncategorized | No Comments »
2. ब्रह्मचारिणी : दधना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तामा॥ परिचय : माँ दुर्गा का द्वितीय स्वरूप 'ब्रह्मचारिणी' है। यहाँ ब्रह्म शब्द का अर्थ 'तपस्या' है, अर्थात 'तप' का आचरण करने वाली ... Read more..Saturday, September 12th, 2009 Posted in Uncategorized | No Comments »
1. शैलपुत्री : वन्दे वाछितलाभाय चन्द्रार्धतशेखराम्। वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥ परिचय : माँ दुर्गा का प्रथम स्वरूप 'शैलपुत्री' है। अपने पिता राजा दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ में अपने पति भगवान ... Read more..Saturday, September 12th, 2009 Posted in Uncategorized | No Comments »
प्रिय भक्त पाठकों! जय श्री श्याम!!हम शिवपत्नी माँ भगवती के नौ स्वरूपों का संक्षिप्त परिचय प्रकाशित कर रहे हैं। नवरात्रि का पर्व साल में दो बार आता है। आश्विन और ... Read more..