श्री गणेशाय नम: :: श्याम प्रभु खाटू वाले का मुख्य समाचार पत्र ::


ऐतिहासिक, अद्भुद श्री श्याम मनुहार महोत्सव में ठहर गये श्रद्धालु

August 26th, 2010 admin Posted in Important News | No Comments »

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खाटूश्यामजी : श्री बालाजी बाल परिवार मण्डल (ग्वालियर) द्वारा श्री श्याम मंदिर समिति (पंजी.) के सान्निध्य में ‘श्री श्याम मनुहार महोत्सव’ खाटूश्यामजी में 20-21-22 जुलाई 2010 को श्री श्याम मंदिर परिसर में आयोजित किया गया। श्री श्याम मनुहार महोत्सव का मुख्य उद्देश्य श्री श्याम मंदिर के नव निर्माण एवं विस्तार में आ रही अदालती अड़चनों को दूर कर भक्तों द्वारा श्री श्याम मंदिर का विस्तार कार्य शीघ्र आरम्भ करवाने हेतु श्री श्याम बाबा खाटू वाले से मनुहार करना था। 21 जुलाई को कानोडिया कोठी से रिक्त हुए स्थान पर आयोजित रात्रि जागरण एवं भजनों द्वारा श्री श्याम प्रभु की मनुहार करते हुए ‘श्री श्याम मनुहार महोत्सव’ के मुख्य संयोजक श्री पप्पू शर्मा ने हजारों दर्शनार्थियों के बीच कहा कि श्री श्याम बाबा के मंदिर का विस्तार करना भक्तों का कार्य है। श्री श्याम बाबा भक्तों के सभी कार्य बनाते हैं। अत: करोड़ों भक्तों की सुविधार्थ श्री श्याम बाबा कृपापूर्वक मंदिर विस्तार के कार्य में आ रही अदालती बाधाओं को समाप्त कर विस्तार कार्य के मार्ग को प्रशस्त करें।

 श्री श्याम मनुहार महोत्सव निर्धारित समयानुसार रात्रि 9 बजे श्री श्याम प्रभु की पवित्रा ज्योति के प्रज्ज्वलन के साथ आरम्भ हो गया। शास्त्रीय श्याम भजन गायक श्री संजय प्रभाकर ने राग शुद्धकल्याण पर आधरित श्री गणेश वन्दना के गायन से ‘श्री श्याम मनुहार महोत्सव’ का शुभारम्भ किया- ‘म्हे गणपत नै प्रथम मनावाँ, श्याम मनुहार महोत्सव माँही।’ श्री संजय प्रभाकर ने ‘श्री श्याम मनुहार महोत्सव’ के मंच से इतिहास रचते हुए पहलीबार शास्त्रीय राग-रागनियों पर आधरित भजनों का गायन किया। तत्पश्चात श्री श्याम भक्त कवि एवं गायक श्रद्धेय कुंजबिहारीजी  (वृंदावन) ने ‘राधरानी के नथ पर मोर नाचे, मोर नाचे चितचोर नाचे’ गीत गाकर उपस्थित भक्त समुदाय को रसविभोर कर दिया।

श्री श्याम मनुहार महोत्सव में मुख्य रूप से भजन गायन कर रहे प्रख्यात भजन गायक श्री पप्पू शर्मा (खाटूवाले) ने श्री श्याम मनुहार का उद्देश्य समझाते हुए महोत्सव का शीर्षक गीत ‘श्याम मनुहार महोत्सव है’ गाया तो भजन गी लय पर तालियाँ बजाते एवं नृत्य करते हुए हजारों श्याम भक्त-प्रेमियों’ ‘श्री श्याम मनुहार महोत्सव’ के स्वर में अपना स्वर भी सम्मिलित किया। श्री पप्पू शर्मा ने 3.30 घंटे से भी अधिक समय तक गायन किया। उन्होंने जब तक भजन गाया एकादशी की रात्रिा में दर्शनार्थी भक्तों की पंक्ति थम गई थी। मंच के सामने पंक्तिबद्ध हजारों दर्शनार्थी भक्तों ने उस समय श्री श्याम प्रभु के दर्शन करने से अच्छा मंदिर विस्तार की बाधओं को दूर करने हेतु श्री श्याम प्रभु से मुनहार कर रहे भक्तों के साथ मिलकर मनुहार के  भाव को अपना भरपूर समर्थन देना उचित समझा।

वृंदावन से आमंत्रिात साधिव पूर्णिमा, श्री मनोज शर्मा (ग्वालियर) एवं श्री दासमहेन्द्र निजामपुरिया, श्री कुमार भविष्य, कुमारी सपना शर्मा ने भी भजनों की अमृतवर्षा के माध्यम से ‘श्री श्याम मनुहार महोत्सव’ के भाव को पुष्ट किया। ‘श्री श्याम मनुहार महोत्सव’ के अन्तर्गत रात्रि जागरण एवं भजन-संकीर्तन का महोत्सव प्रात: 4 बजे के स्थान पर 6.30 बजे के बाद समाप्त हुआ।

‘श्री श्याम मनुहार माहेत्सव’ में श्री श्याम मंदिर समिति (पंजी.) के अध्यक्ष श्री राजेन्द्र सिंह चौहान, मंत्री श्री प्रताप सिंह चौहान एवं कोषाध्यक्ष श्री विक्रम सिंह चौहान ने अपना सान्निध्य प्रदान किया। सीकर जिला के कलैक्टर, अतिरिक्त जिला कलैक्टर एवं एडीशनल जिला कलैक्टर भी ‘श्री श्याम मनुहार महोत्सव’ में उपस्थित हुए। देश के विशिष्ट श्याम भक्तों यथा श्री पदमकुमार परसरामपुरिया, श्री बाबूलालजी दीवान, श्री रामकुमारजी, श्री शुभकरण करनानीजी, श्री रामनिवास गुप्ता, श्री विज्येंद्र जैन, श्री संजीव मित्तल, श्री सुरेश पंडित, श्री अजय शर्मा, श्री विजय शर्मा (श्री श्याम प्रेम मंडल, दिल्ली), श्री निर्मल खरकिया (कोलकाता), श्री दिनेश जिंदल आदि ने श्री श्याम मनुहार महोत्सव को अपना समर्थन दिया। इन सभी श्याम भक्तों को श्री श्याम मंदिर समिति (पंजी.) द्वारा प्रतीक चिन्ह, पुष्प माला एवं दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। श्री लाला सेठजी सहित अनेकों खाटूग्राम वासियों ने भी ‘रात्रि जागरण’ में अपनी उपस्थिति प्रदान की और ‘श्री श्याम मनुहार महोत्सव’ के भाव को प्रगाढ़ किया।

‘श्री श्याम मनुहार महोत्सव’ तीन चरणों में सम्पन्न हुआ। प्रथम चरण में 20 जुलाई को प्रात: 6 बजे रींगस स्थित परसरामपुरिया विश्राम भवन से एक विशाल श्री श्याम ध्वजा पदयात्रा का शुभारम्भ हुआ। श्री बालाजी बाल परिवार मण्डल (ग्वालियर) एवं श्री पप्पू शर्मा के नेतृत्व में आयोजित इस श्री श्याम ध्वजा पदयात्रा में श्री श्याम प्रभु के निमित्त 108 धवजाएँ, श्री हनुमानजी के निमित्त 5 धवजाएँ एवं पाँच देवों के निमित्त एक विशाल पचरंगी ध्वजा सम्मिलित की गई थी। ध्वजा यात्रा में 1500 पदयात्रियों ने हिस्सा लिया। पचरंगी ध्वजा लेकर श्री पप्पू शर्मा सबसे आगे चल रहे थे। श्री बालाजी बाल परिवार मण्डल (ग्वालियर) के श्री संजीव गर्ग के मार्गदर्शन में सभी पदयात्री ‘ओम श्री श्यामदेवाय नम:’ महामंत्र का जाप करते हुए खाटूश्यामजी की ओर बढते जा रहे थे। तभी एक चमत्कारित घटना सामने आई, ध्वजायात्रा के साथ-साथ तोतों का एक विशाल झुंड ध्वजा पथ के दोनों ओर लहरा रहे नीम के पेड़ों के उपर आधे रास्ते तक उड़ते हुए चले। सभी श्याम भक्तों ने इस घटना को एक शुभ संकेत के रूप में देखा।

10 किमी पर श्री श्याम धवजा पदयात्रा ने विश्राम हेतु पड़ाव डाला। तभी आकाश में मंडरा रहे काले बादलों ने बरसना आरम्भ कर दिया। परन्तु पदयात्रिायों ने भीषण वर्षा में भी पदयात्रा को अनवरत रखा। इसके पश्चात खाटूश्यामजी तक वर्षा होती रही। तोरणद्वार के समीप से सभी पदयात्री एकसाथ श्री श्याम मंदिर की ओर बढ़े। पचरंगी धवता लिये श्री पप्पू शर्माजी एवं मोरछड़ी लहराते हुए श्री संजीव गर्गजी पदयात्रियों का नेतृत्व करते हुए बढ़ रहे थे। सभी धवजाएँ अपने निर्धारित स्थानों पर ‘ओम श्री श्यामदेवाय नम:’ महामंत्र के जाप  के साथ फहरा दी गईं।

21 जुलाई को दोपहर दो बजे श्री पप्पू शर्मा जी के निवास ‘माँ’ से श्री बालाजी बाल परिवार मण्डल (ग्वालियर) के सदस्यों के साथ एक शोभायात्रा दोपहर 2 बजे श्री श्याम मंदिर की ओर प्रस्थित हुई। इस शोभायात्रा में श्री श्याम बाबा के श्रंगार हेतु पोशाक, चाँदी का घंटा, चाँदी की गदा आदि श्री श्याम प्रभु को समर्पित की गई। संध्या समय गुलाबी पोषाक में श्री श्याम प्रभु का श्रंगार अत्यंत ही मनमोहक लग रहा था।

‘श्री श्याम मनुहार महोत्सव’ के तृतीय चरण में 22 जुलाई को महोत्सव स्थल पर विशाल भंडारा आयोजित किया गया। हजारों श्याम प्रेमियों ने बैठकर बारी-बारी से दाल, बाटी, चूर्मा, रायता आदि का प्रसाद पाया।

‘श्री श्याम मनुहार महोत्सव’ के तीन दिवसीय महाआयोजन ने देश के प्रत्येक श्याम प्रेमी-भक्तों को आश्वस्त किया कि श्री श्याम बाबा करोड़ों भक्तों की मनुहार को अवश्य सुनेंगे ताकि श्री श्याम मंदिर के समुचित विस्तार का मार्ग शीघ्र प्रशस्त हो सके।

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शीघ्र ही पूरी होगी मनुहार, भक्तों को है पूर्ण विश्वास

August 26th, 2010 admin Posted in Important News | No Comments »

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खाटूश्यामजी : श्री बालाजी बाल परिवार मण्डल (ग्वालियर) द्वारा 21 जुलाई को खाटूधाम में आयोजित श्री श्याम मनुहार महोत्सव में श्री श्याम बाबा से की गई ‘मनुहार’ शीघ्र ही पूर्री होगी, ऐसा देश के करोड़ों श्याम भक्तों को पूर्ण विश्वास है। इतिहासकार श्री देवेन्द्र कुमार शर्मा के अनुसार खाटूश्यामजी के इतिहास की यह पहली घटना है जिसमें श्री श्याम प्रभु मनुहार महोत्सव के संयोजक श्री पप्पू शर्मा ने हजारों दर्शनार्थियों को महोत्सव का उद्देश्य समझाते हुए कहा कि ”क्या कभी भगवान ने अपना मंदिर बनाया है? भगवान का मंदिर तो सदैव भगवान के भक्तों ने ही बनाया है। अत: श्री श्याम मंदिर का विस्तार करना भक्तों का कार्य है, न कि भगवान का और श्री श्याम बाबा अपने भक्तों के सभी कार्य बनाते हैं, चुँकि मंदिर का विस्तार करना भक्तों का कार्य है अत: हम सभी श्री श्याम बाबा से मनुहार करने हेतु एकत्र हुए हैं कि प्रभु अप भक्तों के इस कार्य को भी पूरा करने की कृपा करें।” महोत्सव के पश्चात देश के श्याम भक्तों के बीच हुई चर्चाओं से यह बात निकलकर सामने आई है कि भक्तों के अन्य कार्यों की ही तरह श्याम बाबा शीघ्र ही अपने मंदिर के विस्तार के कार्य में आ रही अदालती बाधा को भी दूर करेंगे, जिससे भक्तों द्वारा उनके मंदिर के विस्तार का कार्य निर्विघ्न सम्भव हो पाएगा।

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शास्त्रीय संगीत पद्धति से पद गाकर श्याम प्रभु को रिझाने से कुछ वर्षों में खाटूश्यामजी में भी वृंदावन जैसी कृपा बरसेगी : कुंजबिहारीजी

August 26th, 2010 admin Posted in Important News | No Comments »

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खाटूश्यामजी : श्री श्याम बाबा के धम खाटूश्यामजी में पिछले अप्रैल महिने की शुक्ल एकादशी से हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की नि:शुल्क कार्यशाला कार्यरत है। इस कार्यशाला का शुभारम्भ शास्त्रीय गायक श्री संजय प्रभाकर ने श्री श्याम प्रभु की प्रेरणा से किया है। संगीत कार्यशाला में शास्त्रीय संगीत के जिज्ञासुओं को हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के बारे बताया जाता है। संगीत कार्यशाला को अन्य श्याम भक्तों का सहयोग भी मिल रहा है। श्री श्रवण कुमार अग्रवाल (दिल्ली)] श्री पप्पू शर्मा (खाटूश्यामजी) एवं श्री श्याम सेवा मण्डल (कोलकाता) आदि ने शास्त्रीय संगीत की कार्यशाला के प्रयासों को अपना सहयोग प्रदान किया है।

21 जुलाई 2010 को शुक्ल एकादशी के दिन वरिष्ठ श्याम भक्त कवि एवं गायक श्रद्धेय कुँजबिहारीजी (वृंदावन) शास्त्रीय संगीत की कार्यशाला को अपना आशीर्वाद देने आए। उन्होंने कार्यशाला में राग भीमपलासी का अध्ययन कर रहे संगीत ज्ञिासुओं से मिलकर श्री संजय प्रभाकर से कहा-

”यह कार्य पहले ही आरम्भ हो जाना चाहिये था। शास्त्रीय संगीत भगवान को प्रसन्न करने का सर्वोत्तम माध्यम है। शास्त्रीय संगीत के रागों पर आधारित भक्ति पद गाने की यह पद्धति भारतवर्ष के महान संतों ने आरम्भ की थी। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है श्रीधाम वृंदावन में पूजनीय संतों द्वारा शास्त्रीय संगीत की राग-रागनियों पर पद गायन से भगवान को प्रगट करना है। वृंदावन धाम के श्री बाँकेबिहारीजी संगीत गुरु बाबा हरिदास के द्वारा प्रगट, साक्षात मूर्ति है। श्रीधाम वृंदावन में संतों द्वारा भक्ति-भाव से भजन-संकीर्तन करके 7 प्रगट मूर्तियों को अपनी सेवा से प्रसन्न कर भावुक भक्तों को भगवान के चरणों से लगाया।

खाटूधाम में श्याम भक्त बाबा को रिझाने का कार्य सैकड़ों वर्षों से कर रहे हैं। भजन-कीर्तनों में लोक साहित्यक भक्ति पद गाकर बाबा को रिझाने का निरंतर प्रयास खाटूधाम में हो रहा है। अब शास्त्रीय संगीत द्वारा भक्त कवियों की रचनाएँ तात्कालिक गायक गाकर भगवान को रिझाने का प्रयास करेंगे तो कुछ वर्षों में भगवान श्यामसुन्दर के वृंदावन धाम जैसे ही खाटूधाम में भी श्याम बाबा की कृपा निश्चय ही बरसेगी।”

 

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श्री श्याम अखण्ड ज्योति पाठ के आधार कहे जाने वाले “भारतसार” ग्रंथ में कोई “सार” नजर नहीं आ रहा है

August 26th, 2010 admin Posted in Important News | No Comments »

खाटूश्यामजी : श्री श्याम संसार पिछले कुछ महिनों से श्री श्याम बाबा की कथा पर शोधरत है। जैसा कि पिछले अंक में बताया गया था कि श्री श्याम संसार के सम्पादक को ‘भारतसार’ नामक ग्रंथ दिल्ली के पीतमपुरा में ही मिल गया है। जुलाई की एकादशी को ‘भारतसार’ ग्रंथ का प्रदर्शन खाटूश्यामजी में किया गया था। श्री देवेन्द्र कुमार शर्मा ने ‘भारतसार ग्रंथ’ जो जर-जर अवस्था में था को एक महिने हेतु अपने पास रख लिया था। श्री देवेन्द्र कुमार शर्माजी (इतिहासकार) ने श्री श्याम संसार को बताया- ”श्री बर्बरीक चरित्र पर आधरित कुछ अंश मैंने इस ग्रंथ में पढ़ा, जिसका मेल हमारे प्राचीन ग्रंथों महाभारत, स्कधपुराण एवं श्रीमद्भागवत के अनुरूप नहीं है। प्रस्तुत ग्रंथ में शुरू में ही आदि पर्व खण्ड में वीर बर्बरीक का जन्म हिडिम्बा के संसर्ग से हुआ बताया गया है। इतना ही नहीं भारतसार के पृष्ठ 24 में वर्णित है कि हिडिम्बा ने दो पुत्रों को जन्म दिया था जिसमें पहला घटोत्कच एवं दूसरा बर्बरीक था, जो कि बहुत हास्यास्पद एवं आश्चर्यजनक है। ऐसा वर्णन महाभारत में कहीं भी नहीं मिलता है।

इसी ग्रंथ के भीष्म पर्व में वर्णित है कि श्रीकृष्ण ने बर्बरीक से रणभूमि में प्रथम आहुति देने हेतु शीश मांगा तो वीर बर्बरीक ने अपने जटाजूट को पकड़ा और अपना शीश काटकर श्रीकृष्ण को दे दिया अत्यंत ही भ्रामक है।

अहलवती से भीमसेन के विवाह का उल्लेख इस ग्रंथ में कहीं भी नहीं है, और ना ही अहलवती नामक किसी अन्य पात्र ही इस ग्रंथ में प्रकाशित है।

भारतसार के पृष्ठ संख्या 99 पर घटोत्कच के एक पुत्र अनन्तपर्वा का उल्लेख मिलता है जो महाभारत के अनुसार नहीं है।

महाभारत के पश्चात पाण्डवों का बर्बरीक के पास पहुँचना और श्रीकृष्ण द्वारा कलियुग में पूजे जाने का वृतान्त भी इस पुस्तक में नहीं है।

युद्ध नियमों के अनुसार शत्रु सेना पर रात्रि के समय प्रहार करना नीति विरुद्ध था, फिर भी घटोत्कच द्वारा कर्ण पर रात्रि में प्रहार करना भारतसार के पृष्ठ संख्या 277 पर दर्शाया गया है, जोकि महाभारत से मेल नहीं खाता है।

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि भारतसार किसी व्यक्ति विशेष द्वारा लिखा गया ऐसा ग्रंथ है जिसमें कुछ प्राचीन ग्रंथों से लेकर तोड़-मरोड़ कर लिखी गईं सुनी-सुनाई बातें व मनगढ़ंत घटनाएँ वर्णित हैं। ऐसी घटनाओं को कुछ तथाकथित श्याम भक्तों ने भी अपनी भजन रचनाओं में समावेश कर डाला है। भारतसार में संस्कृत श्लोकों का कहीं भी समावेश नहीं किया गया है।

निष्कर्षत: यही कहा जा सकता है कि भारतसार एक सारहीन पुस्तक है जिसका अधययन भ्रांतिपूर्ण है। इसमें वर्णित घटनाओं का किसी भी प्रामाणिक ग्रंथ से मेल नहीं खाता है, अत: यह सारहीन है।

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सकल अशिक्षा को मिटा सकती है ‘एकल’/ दिल्ली में बाबा सत्यनारायण मौर्या ने किया जनजागरण

August 26th, 2010 admin Posted in Important News | No Comments »

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दिल्ली : रविन्द्रनाथ ठाकुर ने लिखा था- ‘जोदी तोर डाक शूने केउ ना आशे तौबे एकला चौलो रे’, इसी सिद्धांत के अनुसार भारत लोक शिक्षा परिषद् (पंजी) ने 63वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर भारत के सुदूर ग्रामीण, अंदरूणी एवं वनवासी क्षेत्रों में शिक्षा के प्रसार एवं प्रचार हेतु शहरी लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया। मुख्य रूप से आमंत्रित विश्वविख्यात कवि, गायक, चित्रकार एवं जन-जागरण के अग्रदूत बाबा सत्यनारायण मौर्या ने भारत माता की आरती शीर्षक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। उन्होंने अपनी उत्कृष्ट वक्तृत्व कला एवं अन्यतम प्रस्तुतिकरण के माधयम से महाराजा इंजीनियरिंग कॉलेज के सभागार में उपस्थित श्रोताओं को देश की वर्तमान दशा से अवगत कराते हुए देश के लिये कुछ करने का जोश भर दिया। उन्होंने अपनी प्रस्तुति से यह सिद्ध कर दिया कि जिस प्रकार वह एक मंच पर एक ही समय में संगीत, कविता, सम्भाषण एवं चित्रकारी आदि विधाओं का सफल प्रदर्शन एक साथ कर रहे हैं, उसी प्राकर प्रत्येक व्यक्ति अपनी दिनचर्या का पालन करते हुए देश व समाज के लिये भी कुछ न कुछ अवश्य कर सकता है। बाबा सत्यनारायण मौर्या ने अपने अद्भुद कार्यक्रम द्वारा समाज के आम एवं खास लोगों को एक विद्यालय योजना हेतु हर प्रकार का सहयोग देने हेतु तत्पर रहने का संदेश भी दिया।

कार्यक्रम का संचालन प्रख्यात समाजसेवी एवं राष्ट्रभक्त श्री जगदीश मित्तलजी ने किया। उन्होंने कहा कि एकल विद्यालय देश के सभी राज्यों के 180 जिलों में 35000 विद्यालय कार्यरत हैं जिनसे 27 लाख लोगों ने शिक्षा का लाभ पाया है। श्री जगदीश मित्तलजी ने कहा कि 2013 तक सम्पूर्ण भारत में एक लाख एकल विद्यालय खोलने की योजना है।

श्री श्याम संसार का मानना है कि भारत लोक शिक्षा परिषद् (पंजी) द्वारा संचालित ‘एकल विद्यालय योजना’ समाज के समर्थ एवं सक्षम लोगों के सहयोग से भारत में अशिक्षा के प्रतिशत को शूण्य करने की दिशा में बहुत बड़ी भूमिका निभाने को आतुर है। सर्वशिक्षा का यह महाअभियान इस उक्ति को सार्थक कर सकता है कि ‘सकल अशिक्षा को मिटा सकती है विद्यालय योजना एकल’।

आओ सुदूर गाँवों को उन्नत बनाएँ

वनवासी समाज में शिक्षा का अलख जगाएँ

प्राथमिक शिक्षा, आरोग्य शिक्षा

ग्राम विकास शिक्षा एवं स्वाभिमान शिक्षा।

से भारत का जन-मन हर्षाएँ!

कार्यक्रम में एकल विद्यालय योजना के लिये मदद करने हेतु पश्चिमी व उत्तरी दिल्ली चैप्टर के नवनियुक्त पदाधिकारियों की घोषणा एवं उनका सम्मान किया गया। पश्चिमी दिल्ली के नवनियुक्त पदाधिकारी- संरकक्षकगण : श्री अमृत सिंघला, श्री जयकिशन गुप्ता, श्री गजानन्द साँवरिया, श्री संजीव टेकरीवाल, परामार्शदाता : श्री एस. एन. बंसल, श्री विज्येन्द्र जैन, श्री एस. के. चौधरी, श्री सीताराम गुप्ता, अध्यक्ष : श्रीरामनिवास गुप्ता, उपाध्यक्ष : श्री श्रवण अग्रवाल, श्री एस. के. चौधरी, श्री अमृत गोयल, श्री अरुण गुप्ता, महामंत्री : श्री टीकम सर्राफ, मंत्री : श्री सन्तराम गोयल, श्री कर्मवीर सोलंकी, श्री मनमोहन अग्रवाल, श्री जितेन्द्र गुप्ता एवं कोषाध्यक्ष श्री अरुण गोयल हैं।

उत्तरी दिल्ली के नवनियुक्त पदाधिकारी- संरकक्षकगण : श्री प्रेमसागर गोयल, श्री सुरेन्द्रपाल गुप्ता, श्री शिवदत्त गुप्ता, श्री चाँदकिशोर अग्रवाल, श्री बलवन्त राय, अध्यक्ष : श्री नरेन्द्र गोयल, उपाध्यक्ष : श्री राजेन्द्र गर्ग, श्री प्रदीप गुप्ता, श्री रामलाल अग्रवाल, श्री उमेश गुप्ता, महामंत्री : श्री गोपाल गोयल, मंत्री : श्री श्रीमती अनीमा मुकीम, श्री रवि मित्तल, श्री वेद प्रकाश गुप्ता, श्री विजय गुप्ता एवं कोषाध्यक्ष श्री राजकुमार मित्तल हैं।

एकल विद्यालय अभियान योजना कार्यक्रम में श्री वासुदेव अग्रवाल ने अपना सान्निध्य प्रदान किया। कार्यक्रम में श्री नन्दकिशोर गर्ग, श्री पी. एल. चतुर्वेदी, श्री वी. पी. अग्रवाल, श्री शंकर मित्तल, श्री रमेश अग्रवाल, श्री महेन्द्र गुप्ता, श्री सत्यनारायण बन्धु एवं प्रो. श्री मंजुश्री भी उपस्थिति थे। इनके अतिरिक्त प्रख्यात राष्ट्रीय कवि श्री राजेश ‘चेतन’, बाबा के विशेष सहयोगी श्री राजेश ‘पथिक/नीरव’, श्री संजय प्रभाकर ने भी अपनी उपस्थिति प्रदान की।

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श्री श्याम मंदिर में पीछे की ओर निकास द्वार खोला गया

August 26th, 2010 admin Posted in Important News | No Comments »

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खाटूश्यामजी : श्री श्याम बाबा खाटू वाले के मंदिर में प्रत्येक शुक्ल एकादशी एवं छुट्टी के दिनों में जिस प्रकार से भक्तों की भीड़ बढ़ती जा रही है, ऐसे में भक्तों के निकास हेतु श्री श्याम मंदिर समिति द्वारा हर बार नये-नये प्रयोग किये जाते हैं। 22 जून 2010 को भक्तों के निकास के लिये श्री श्याम मंदिर में स्थित शिवजी के मंदिर के सामने पीछे की ओर जाने के लिये एक नया निकास द्वार खोला गया। इस निकास द्वार के खोलने से प्राचीन श्याम मंदिर में सीधे प्रवेश का मार्ग भी खुल गया। आम श्याम भक्तों ने इस निकास द्वार को खोलने हेतु श्री श्याम मंदिर समिति का साधुवाद दिया। ज्ञातव्य है कि मंदिर में वीआईपी दर्शन को दो भागों में पहले ही विभक्त किया जा चुका है। इस कारण अब वीआईपी दर्शन हेतु लम्बी कतार कम हो गई है।

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गुढ़ा के श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में रात्रि जागरण

August 26th, 2010 admin Posted in Important News | No Comments »

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गुढ़ा-पौंख : 24 जुलाई 2010 को झुन्झुनूँ जिला के गुढ़ा कस्बे में स्थित श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर के प्रांगण में रात्रि जागरण एवं भजन-संकीर्तन आयोजित किया गया। गाँव किशारेपुरा के श्री भगवती प्रसाद शर्मा के सान्निध्य में आयोजित इस भजनोत्सव में श्री संजय प्रभाकर, स्थानीय ख्याति प्राप्त ढ़ोलक वादक श्री सलीम, श्री परमेश्वर एवं श्री कालू शर्मा ने भजन गाये। रात्रि 11 बजे आरम्भ हुए इस रात्रि जागरण में शास्त्रीय भजन गायक श्री संजय प्रभाकर ने राग-रागनियों पर आधरित स्व. रामशंकर मिश्र पंकज (देवघर), श्री सोम ठाकुर, ब्रह्मानंद एवं स्वरचित अनेक भजन गाये। प्रात: आरती से पूर्व गोधूली बेला में श्री संजय प्रभाकर ने राग भैरव में तीनताल एवं इसी राग पर आधरित श्री सोमठाकुरजी रचित ‘शिव सनातन पुरुष जय-जय’ भक्ति पद गाया। शास्त्रीय गायक श्री भगवती प्रसाद शर्मा ने ‘काहू संग प्रीति’, ‘मन मूरख मानुष तन की कदर न जानी’, ‘दम निकल जाये कब आदमी का, क्या भरोसा है इस जिन्दगी का’ श्री कालू शर्मा ने ‘साँवरा आज्यो म्हारे देस’ श्री सलीम ने ‘तू कांई जाणे पीड़ पराई’ (राग देस) आदि भजनों का गायन किया। जागरण में राजस्थान के प्रख्यात चित्रकार श्री शंकरलालजी भी उपस्थित थे।

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देवघर के बाबा मंदिर के गर्भगृह में दूसरा द्वार पहले से ही है, उसे बड़ा करने की आवश्यक्ता है

August 17th, 2010 admin Posted in Important News | No Comments »

देवघर : जब भी सावन मेला आने वाला होता है, शिव भक्त काँवड़ियों की बढ़ती संख्या झारखंड स्थित बाबा बैजनाथ मंदिर के गर्भगृह में दूसरे द्वार की चर्चा पर विचार आरम्भ हो जाता है। कोई बाबा मंदिर के गर्भगृह की पश्चिम ओर द्वार खोलने की बात कहता है तो कोई मंदिर प्रांगण के अंदर सुरंग खोदने की सलाह देता है। कहा जाता है कि भारत समेत अमेरिका, यूरोप और जापान के अनेकों इंजिनियरों ने बाबा मंदिर में पश्चिम की ओर दूसरा द्वार खोलने हेतु गर्भगृह का वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया। परन्तु दूसरा द्वार खोलने हेतु किसी ने भी छेनी-हथोड़ी चलाने का दुस्साहस कभी नहीं किया। क्योंकि स्थानीय निवासियों समेत वैज्ञानिकों को यह अंदेशा है कि गर्भगृह में कहीं भी सुराग किया जाएगा तो समूचा मंदिर ताश के पत्तो की तरह ढ़ह जाएगा। परन्तु श्री श्याम संसार का मानना है कि मंदिर के गर्भगृह में दूसरा द्वार पहले से ही विद्यमान है, उसे मात्र बड़ा करने की आवश्यक्ता है। 

सम्पादक संजय प्रभाकर ने गर्भगृह में जहाँ पर नया द्वार खोलने की बात की है वह पश्चिम की ओर नहीं अपितु उत्तर की ओर है। उन्होंने पाया है कि बाबा मंदिर के गर्भगृह में दूसरा द्वार तो विश्वकर्माजी ने पहले से ही छोड़ा हुआ है, बस उसे बड़ा करने की आवश्यक्ता है। वस्तुत: विश्वकर्माजी ने शिव मंदिर निर्माण करते समय एक मुख्य द्वार के अतिरिक्त जलाभिषेक का जल निकासी हेतु उत्तर दिशा की ओर एक सुराख भी किया था। यही है बाबा मंदिर में भगवान विश्वकर्माजी द्वारा बनाया गया दूसरा निकास द्वार। देवघर निवासियों एवं वैज्ञानिकों से श्री श्याम संसार के सम्पादक संजय प्रभाकर अपील करते हैं कि भगवान विश्वकर्माजी द्वारा निर्मित इस जल निकासी के छोटे से सुराख को बड़ा कर दिया जाय। इसमें मनिक भी संदेह नहीं कि बाबा मंदिर के गर्भगृह में पश्चिम, दक्षिण कहीं भी दीवार को काटकर द्वार नहीं खोला जा सकता है। पश्चिम की ओर गर्भगृह की दीवार को तोड़ने से ध्ररना देने वालों को अपार कष्ठ होगा। दक्षिण की आरे द्वार वास्तुशास्त्र के अनुरूप नहीं होगा। अत: उत्तर की ओर जहाँ से जलाभिषेक का जल निकास होता है वहीं एकमात्र स्थान है जहाँ से गर्भगृह में दूसरा द्वार खोला जा सकता है। इस पर किसी को कोई आपत्ति भी नहीं हो सकती है क्योंकि वहाँ पहले से ही एक छिद्र है। श्री श्याम संसार द्वारा करोड़ों शिव भक्तों के कल्याणार्थ यह लेख एक सुझाव मात्र है, इसे मानने और इस पर अमल करने का अधिकार जिला प्रशासन, पंडा समाज, नागरिक भक्त एवं मंदिर समिति को है।

प्रस्तुति : श्री नवीनकृष्ण, एडवोकेट, पत्रकार, देवघर, झारखंड

 

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Importent Notes About Free Workshop On Indian Classical Music In Khatudham

May 8th, 2010 admin Posted in Important News | No Comments »

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रामसेतु ऐतिहासिक राष्ट्रीय धरोहर एवं रामेश्वरम् ‘पवित्र तीर्थ नगर’ घोषित हो

September 13th, 2009 admin Posted in Important News | No Comments »

दिल्ली : ‘राम सेतु रक्षा मंच’ ने राजधनी दिल्ली के रोहिणी क्षेत्र में स्थित विशाल स्वर्ण जयंती पार्क में 30 दिसम्बर 2007 को एक महा विशाल रैली का सफलतम आयोजन किया। 15 लाख से भी अध्कि राम भक्त रैली समापन तक पार्क में उपस्थित थे, जबकि इससे भी अधिक राम भक्त रैली स्थल तक समय पर इसलिए नहीं पहुँच सके, क्योंकि इस दिन दिल्ली पुलीस ने किसी भी अनहोनी से बचने के लिए गहन सुरक्षा घेरे बना रखे थे। रैली में बनाए गए तीन अलग-अलग विशाल मंचों पर साधु-संतों, मुख्य वक्ताओं, अतिथियों, जगद्गुरु शंकराचार्यों, हिन्दू संगठनों के मुख्य पदाधिकारियों एवं तीसरे मंच पर विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों एवं राजनेताओं को उपस्थित देखा गया। रैली में आम जनता के माधयम से वर्तमान यूपीए सरकार तक निम्न बातों को पहुँचाने का सफल प्रयाय किया गया-

1. हम संकल्प करते हैं कि श्रीराम सेतु का कदापि नष्ट नहीं होने देंगे।

2. वाल्मीकी रामायण के 22वें सर्ग में श्रीराम सेतु के निर्माण की वैज्ञानिक प्रक्रिया और सामग्री का विशद विवरण है।

3. भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री रामेश्वर ज्योतिर्लिंग का मूल नाम सेतूबंध् रामेश्वर है।

5.  रामसेतु की प्रामाणिकता का एक आधार यह भी है रामनाथपुरम के 1972 में जारी किए गए एक सरकारी गजट के अनुसार श्रीराम सेतु को ‘रामार पालम्’ अर्थात रामसेतु लिखा गया है और वहाँ के राजा का ‘सेतुपति’ की उपाध् दी जाती है।

6. भगवान श्रीराम के अस्तित्व को नकारने का तात्पर्य आदि तीर्थंकर भगवान रिषभदेव, भगवान बुद्द तथा भगवान श्रीराम के पुत्राद्वय लव एवं कुश द्वारा प्रवर्तित बेदी और सोढ़ी वंश में अवतीर्ण हुए गुरुनानकदेवजी एवं गुरुगोविन्द सिंहजी, महाराणा प्रताप तथा छत्रपति शिवाजी महाराज के अस्तित्व को भी अस्विकार करना होगा।

7. श्रीराम सेतु का विध्वंस भारत की अस्मिता और आसथा का विध्वंस है।

8. केन्द्र सरकार का वकतव्य है कि वह श्रीरामसेतु को तोड़कर चैनल (एसएससीपी) बनाने के अपने अविवेकपूर्ण निर्णय को तुरन्त रद्द करने की घोषणा करे और भगवान श्रीराम को अनैतिहासिक और काल्पिनिक बताने वाले अपने आधिकारिक शपथ पत्र के लिए राष्ट्र से क्षमायाचना करे।

9. सरकार को चाहिये कि रामेश्वरम समुद्र में स्थित श्रीरामसेतु को ऐतिहासिक संरक्षित ऐतिहासिक राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया करे।

10. रामेश्वरम् को पवित्र तीर्थ नगर घोषित करना चाहिये जिससे श्रीराम सेतु की सुरक्षा पर भविष्य में किसी प्रकार का संकट न आए।

11: यदि वर्तमान सरकार ने श्रीराम सेतु को तोड़ने पर कायम रही तो विश्वव्यापी उग्र आन्दोलन किया जाएगा। रैली में मंचासीन हिन्दू नेता श्री प्रवीण तोगड़िया, साध्वि रितंभरा एवं श्री अशोक सिंहल ने उपस्थित जन समुद्र से रामसेतु की रक्षार्थ लाखों मुट्ठियाँ तनवाकर संकल्प लिया कि सभी तन-मन-धन से रामसेतु की रक्षा करेंगे।

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