श्री गणेशाय नम: :: श्याम प्रभु खाटू वाले का मुख्य समाचार पत्र ::


नये साल के लिए एक जनवरी ही क्यों? विनोद बंसल

December 29th, 2010 admin Posted in Important News | No Comments »

एक जनवरी के नजदीक आते ही जगह-जगह हैप्पी न्यू ईयर के बैनर व होर्डिंग लगने लगते हैं। जश्न मनाने की तैयारियां प्रारम्भ हो जाती हैं। होटल, रेस्तरॉ, व पव इत्यादि अपने-अपने ढंग से इसके आगमन की तैयारियां करने लगते हैं। पोस्टर व कार्डों की भरमार के साथ दारू की दुकानों की भी चांदी कटने लगती है। कहीं कहीं तो जाम से जाम इतने टकराते हैं कि घटनाऐं दुर्घटनाओं में बदल जाती हैं और मनुष्य- मनुष्यों से तथा गाड़ियां गाडियों से भिडने लगते हैं। रात-रात भर जाग कर नया साल मनाने से ऐसा प्रतीत होता है मानो सारी खुशियां एक साथ आज ही मिल जायेंगी। हम भारतीय भी पश्चिमी अंधानुकरण में इतने सराबोर हो जाते हैं कि उचित अनुचित का बोध त्याग अपनी सभी सांस्क्रतिक मर्यादाओं को तिलांजलि दे बैठते हैं। पता ही नहीं लगता कि कौन अपना है और कौन पराया। 

जनवरी से प्रारम्भ होने वाली काल गणना को हम ईस्वी सन् के नाम से जानते हैं जिसका सम्बन्ध ईसाई जगत् व ईसा मसीह से है। इसे रोम के सम्राट जूलियस सीजर द्वारा ईसा के जन्म के तीन वर्ष बाद प्रचलन में लाया गया। भारत में ईस्वी सम्वत् का प्रचलन अग्रेंजी शासकों ने 1752 में किया। अधिकांश राष्ट्रों के ईसाई होने और अग्रेंजों के विश्वव्यापी प्रभुत्व के कारण ही इसे विश्व के अनेक देशों ने अपनाया। 1752 से पहले ईस्वी सन् 25 मार्च से प्रारम्भ होता था किन्तु 18वीं सदी से इसकी शुरूआत एक जनवरी से होने लगी। ईस्वी कलेण्डर के महीनों के नामों में प्रथम छः माह यानि जनवरी से जून रोमन देवताओं (जोनस, मार्स व मया इत्यादि) के नाम पर हैं। जुलाई और अगस्त रोम के सम्राट जूलियस सीजर तथा उनके पौत्र आगस्टस के नाम पर तथा सितम्बर से दिसम्बर तक रोमन संवत् के मासों के आधार पर रखे गये। जुलाई और अगस्त, क्योंकि सम्राटों के नाम पर थे इसलिए, दोनों ही इकत्तीस दिनों के माने गये अन्यथा कोई भी दो मास 31 दिनों या लगातार बराबर दिनों की संख्या वाले नहीं हैं। 

ईसा से 753 वर्ष पहले रोम नगर की स्थापना के समय रोमन संवत् प्रारम्भ हुआ जिसके मात्र दस माह व 304 दिन होते थे। इसके 53 साल बाद वहां के सम्राट नूमा पाम्पीसियस ने जनवरी और फरवरी दो माह और जोड़कर इसे 355 दिनों का बना दिया। ईसा के जन्म से 46 वर्ष पहले जूलियस सीजन ने इसे 365 दिन का बना दिया। सन् 1582 ई. में पोप ग्रेगरी ने आदेश जारी किया कि इस मास के 04 अक्टूबर को इस वर्ष का 14 अक्टूबर समझा जाये। आखिर क्या आधार है इस काल गणना का ? यह तो ग्रहों व नक्षत्रों की स्थिति पर आधारित होनी चाहिए।

 स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् नवम्बर 1952 में वैज्ञानिक और औद्योगिक परिषद के द्वारा पंचांग सुधार समिति की स्थापना की गयी। समिति ने 1955 में सौंपी अपनी रिपोर्ट में विक्रमी संवत को भी स्वीकार करने की सिफारिश की थी। किन्तु, तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू के आग्रह पर ग्रेगेरियन कलेण्डर को ही सरकारी कामकाज हेतु उपयुक्त मानकर 22 मार्च 1957 को इसे राष्ट्रीय कलेण्डर के रूप में स्वीकार कर लिया गया।

ग्रेगेरियन कलेण्डर की काल गणना मात्र दो हजार वर्षों के अति अल्प समय को दर्शाती है। जबकि यूनान की काल गणना 3579 वर्ष, रोम की 2756 वर्ष यहूदी 5767 वर्ष, मिस्त्र की 28670 वर्ष, पारसी 198874 वर्ष तथा चीन की 96002304 वर्ष पुरानी है। इन सबसे अलग यदि भारतीय काल गणना की बात करें तो हमारे ज्योतिष के अनुसार पृथ्वी की आयु एक अरब 97 करोड़ 39 लाख 49 हजार 109 वर्ष है। जिसके व्यापक प्रमाण हमारे पास उपलब्ध हैं। हमारे प्राचीन ग्रंथों में एक-एक पल की गणना की गयी है। 

जिस प्रकार ईस्वी सम्वत् का सम्बन्ध ईसा जगत से है उसी प्रकार हिजरी सम्वत् का सम्बन्ध मुस्लिम जगत और हजरत मुहम्मद साहब से है। किन्तु विक्रमी सम्वत् का सम्बन्ध किसी भी धर्म से न हो कर सारे विश्व की प्रकृति, खगोल सिद्धांत व ब्रह्माण्ड के ग्रहों व नक्षत्रों से है। इसलिए भारतीय काल गणना पंथ निरपेक्ष होने के साथ सृष्टि की रचना व राष्ट्र की गौरवशाली परम्पराओं को दर्शाती है। इतना ही नहीं, ब्रह्माण्ड के सबसे पुरातन ग्रंथ वेदों में भी इसका वर्णन है। नव संवत् यानि संवत्सरों का वर्णन यजुर्वेद के 27वें व 30वें अध्याय के मंत्र क्रमांक क्रमशः 45 व 15 में विस्तार से दिया गया है। विश्व में सौर मण्डल के ग्रहों व नक्षत्रों की चाल व निरन्तर बदलती उनकी स्थिति पर ही हमारे दिन, महीने, साल और उनके सूक्ष्मतम भाग आधारित होते हैं।

 इसी वैज्ञानिक आधार के कारण ही पाश्चात्य देशों के अंधानुकरण के बावजूद, चाहे बच्चे के गर्भाधान की बात हो, जन्म की बात हो, नामकरण की बात हो, गृह प्रवेश या व्यापार प्रारम्भ करने की बात हो, सभी में हम एक कुशल पंडित के पास जाकर शुभ लग्न व मुहूर्त पूछते हैं। और तो और, देश के बडे से बडे़ राजनेता भी सत्तासीन होने के लिए सबसे पहले एक अच्छे मुहूर्त का इंतजार करते हैं जो कि विशुद्ध रूप से विक्रमी संवत् के पंचांग पर आधारित होता है। भारतीय मान्यतानुसार कोई भी काम यदि शुभ मुहूर्त में प्रारम्भ किया जाये तो उसकी सफलता में चार चांद लग जाते हैं। वैसे भी भारतीय संस्कृति श्रेष्ठता की उपासक है। जो प्रसंग समाज में हर्ष व उल्लास जगाते हुए एक सही दिशा प्रदान करते हैं उन सभी को हम उत्सव के रूप में मनाते हैं। राष्ट्र के स्वाभिमान व देश प्रेम को जगाने वाले अनेक प्रसंग चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से जुडे़ हुए हैं। यह वह दिन है जिस दिन से भारतीय नव वर्ष प्रारम्भ होता है। आईये, इस दिन की महानता के प्रसंगों को देखते हैं -

ऐतिहासिक महत्व

1      यह दिन सृष्टि रचना का पहला दिन है। इस दिन से एक अरब 97 करोड़ 39 लाख 49 हजार 109 वर्ष पूर्व इसी दिन के सूर्योदय से ब्रह्मा जी ने जगत की रचना प्रारंभ की।

2     विक्रमी संवत का पहला दिन: उसी राजा के नाम पर संवत् प्रारंभ होता था जिसके राज्य में न कोई चोर हो, न अपराधी हो, और न ही कोई भिखारी हो। साथ ही राजा चक्रवर्ती सम्राट भी हो। सम्राट विक्रमादित्य ने 2067 वर्ष पहले इसी दिन राज्य स्थापित किया था।

3     प्रभु श्री राम का राज्याभिषेक दिवस : प्रभु राम ने भी इसी दिन को लंका विजय के बाद अयोध्या में राज्याभिषेक के लिये चुना।

4     नवरात्र स्थापना : शक्ति और भक्ति के नौ दिन अर्थात्, नवरात्र स्थापना का पहला दिन यही है। प्रभु राम के जन्मदिन रामनवमी से पूर्व नौ दिन उत्सव मनाने का प्रथम दिन।

5     गुरू अंगददेव प्रगटोत्सव : सिख परंपरा के द्वितीय गुरू का जन्म दिवस।

6     आर्य समाज स्थापना दिवस : समाज को श्रेष्ठ (आर्य) मार्ग पर ले जाने हेतु स्वामी दयानंद सरस्वती ने इसी दिन को आर्य समाज स्थापना दिवस के रूप में चुना।

7     संत झूलेलाल जन्म दिवस : सिंध प्रान्त के प्रसिद्ध समाज रक्षक वरूणावतार संत झूलेलाल इसी दिन प्रगट हुए।

8     शालिवाहन संवत्सर का प्रारंभ दिवस : विक्रमादित्य की भांति शालिनवाहन ने हूणों को परास्त कर दक्षिण भारत में श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने हेतु यही दिन चुना।

9     युगाब्द संवत्सर का प्रथम दिन : 5112 वर्ष पूर्व युधिष्ठिर का राज्यभिषेक भी इसी दिन हुआ।

10   डा0 केशव राव बलीराम हैडगेबार जन्म दिवस : राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संस्थापक थे। 

प्राकृतिक महत्व

1     वसंत ऋतु का आरंभ वर्ष प्रतिपदा से ही होता है जो उल्लास, उमंग, खुशी तथा चारों तरफ पुष्पों की सुगंधि से भरी होती है।

2    फसल पकने का प्रारंभ यानि किसान की मेहनत का फल मिलने का भी यही समय होता है।

3    नक्षत्र शुभ स्थिति में होते हैं अर्थात् किसी भी कार्य को प्रारंभ करने के लिये यह शुभ मुहूर्त होता है।

क्या एक जनवरी के साथ ऐसा एक भी प्रसंग जुड़ा है जिससे राष्ट्र प्रेम जाग सके, स्वाभिमान जाग सके या श्रेष्ठ होने का भाव जाग सके। आइये! विदेशी को फैंक स्वदेशी अपनाऐं और गर्व के साथ भारतीय नव वर्ष यानि विक्रमी संवत् को ही मनायें तथा इसका अधिक से अधिक प्रचार करें।

                                           पता : 329, द्वितीय तल, संत नगर, ईस्ट आफ कैलाश, नई दिल्ली। मो0 9810949109  vinodbansal01@gmail.com

 

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श्री हरि कृपा पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 स्वामी हरिचैतन्य पुरी महाराज व तिजारा मीरा बाई मन्दिर के पीठाधीश्वर स्वामी श्री ललित मोहन जी ओझा दीपावली व नववर्ष की शुभकामनायें देने

December 7th, 2010 admin Posted in Important News | No Comments »

 

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भरतपुर : श्री हरि कृपा पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 स्वामी हरिचैतन्य पुरी महाराज व तिजारा मीरा बाई मन्दिर के पीठाधीश्वर स्वामी श्री ललित मोहन जी ओझा आज दिनांक 11 नवम्बर 2010 को अपना शुभाशीर्वाद देने सरिया हाउस पर पधारे।

विनोद अग्रवाल सरिया वाले ने महाराज श्री का तिलक कर व दुपट्टा ओढा कर स्वागत किया व सभी सदस्यों के द्वारा महाराज श्री को प्रेम भाव से बृज भोज करवाया गया ।

विनोद अग्रवाल सरिया वाले ने शाल व श्रीफल देकर महाराज जी व ओझाजी सम्मान किया । राष्ट्रीय संतो के अपने गृह आगमन से पुरा सरियावाला परिवार आनंदित था। उन्होंने परिवार के सभी सदस्य किरण देवी अग्रवाल, सुमित अग्रवाल, नीतू अग्रवाल, आशीष अग्रवाल, अभय अग्रवाल, अनुप अग्रवाल सभी को अपना शुभाशीर्वाद दिया।

सुमित अग्रवाल, भरतपुर, राज।

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रानीगंज से खाटूश्यामजी तक पदयात्रा 8 जनवरी से (सम्पूर्ण कार्यक्रम)

December 6th, 2010 admin Posted in Important News | No Comments »

रामगढ़ कैंट : श्री श्याम परिवार, चितरंजन मार्ग (रानीगंज) 8 जनवरी 2011 से 21वीं शताब्दी में पश्चिम बंगाल से श्री श्याम प्रभु खाटू वाले की दूसरी विशाल पदयात्रा आयोजित कर रहा है। पहली पदयात्रा 2008 में श्री श्याम भक्त मण्डल (खीदीरपुर) वालों ने आयोजित की थी। यह पदयात्रा फाल्गुन मेला-2011 के पावन अवसर पर खाटूश्यामजी पहुँचेगी। श्री प्रकाश पटवारी (रामगढ़ कैंट) ने ई-मेल द्वारा 62 दिवसीय पदयात्रा का सम्पूर्ण विवरण भेजा है :

08 जनवरी 2011 से सीतारामपुर (24 किमी.)

09 जनवरी 2011 से निरसा (18 किमी.)

10 जनवरी 2011 से गोविन्दपुर (21 किमी.)

11 जनवरी 2011 से श्री श्याम मंदिर, झरिया (25 किमी.)

12 जनवरी 2011 से चास (40 किमी.)

13 जनवरी 2011 से पेटरवार (39 किमी.)

14 जनवरी 2011 से भरेचनगर, रामगढ़कैंट (51 किमी.)

15 जनवरी 2011 से हजारीबाग (44 किमी.)

16 जनवरी 2011 से बरही (39 किमी.)

17 जनवरी 2011 से चौपारन (19 किमी.)

18 जनवरी 2011 से बाराचट्टी (31 किमी.)

19 जनवरी 2011 से शेरघाटी (34 किमी.)

20 जनवरी 2011 से मधुपुर (24 किमी.)

21 जनवरी 2011 से औरंगाबाद (25 किमी.)

22 जनवरी 2011 से डेहरीओनसोन (34 किमी.)

23 जनवरी 2011 से सासाराम (22 किमी.)

24 जनवरी 2011 से कुर्दा (26 किमी.)

25 जनवरी 2011 से मोहनिया (23 किमी)

26 जनवरी 2011 से शयेदराजा (33 किमी.)

27 जनवरी 2011 से मुगलसराय (22 किमी.)

28 जनवरी 2011 से वाराणसी (18 किमी.)

29 जनवरी 2011 से राजा तालाब (15 किमी.)

30 जनवरी 2011 से बाबूसराय (22 किमी.)

31 फरवरी 2011 से गोपीगंज (25 किमी.)

01 फरवरी 2011 से हन्डिया (26 किमी.)

02 फरवरी 2011 से हनुमानगढ़ी (19 किमी.)

03 फरवरी 2011 से इलाहाबाद (19 किमी.)

04 फरवरी 2011 से मूरतगंज (36 किमी.)

05 फरवरी 2011 से सेथनी, सिरेतू (27 किमी.)

06 फरवरी 2011 से कांगा (28 किमी.)

07 फरवरी 2011 से फतेहपुर (34 किमी.)

08 फरवरी 2011 से श्री हनुमान मंदिर, रेबाड़ी, बजुर्ग (21 किमी.)

09 फरवरी 2011 से आशापुर (20 किमी.)

10 फरवरी 2011 से महाराजपुर (21 किमी.)

11 फरवरी 2011 से कानपुर (14 किमी.)

12 फरवरी 2011 से रनिया (22 किमी.)

13 फरवरी 2011 से मंगीसापुर (35 किमी.)

14 फरवरी 2011 से औरैया (40 किमी.)

15 फरवरी 2011 से अजीतमल (24 किमी.)

16 फरवरी 2011 से बकेवर (23 किमी.)

17 फरवरी 2011 से इटावा (20 किमी.)

18 फरवरी 2011 से गोटपुर (30 किमी.)

19 फरवरी 2011 से शिकोहाबाद (27 किमी.)

20 फरवरी 2011 से फिरोजाबाद (20 किमी.)

21 फरवरी 2011 से येतमादपुर (25 किमी.)

22 फरवरी 2011 से आगरा (22 किमी.)

23 फरवरी 2011 से फतेहपुर सिकरी (40 किमी.)

24 फरवरी 2011 से भरतपुर (23 किमी.)

25 फरवरी 2011 से डीग (36 किमी.)

26 फरवरी 2011 से डीग (00 किमी.)

27 फरवरी 2011 से नगर (22 किमी.)

28 फरवरी 2011 से बड़हाभव (24 किमी.)

01 मार्च 2011 से अलवर (30 किमी.)

02 मार्च 2011 सेर् भर्तहरी (35 किमी.)

03 मार्च 2011 सेर् भर्तहरी (00 किमी.)

04 मार्च 2011 से विराटनगर (30 किमी.)

05 मार्च 2011 से त्रिवेणीधाम (35 किमी.)

06 मार्च 2011 से त्रिवेणीधाम (00 किमी.)

07 मार्च 2011 से मुंडरू (20 किमी.)

08 मार्च 2011 से रींगस (20 किमी.)

09 मार्च 2011 से रींगस (00 किमी.)

10 मार्च 2011 से खाटूश्यामजी (18 किमी.)

रानीगंज वालों द्वारा आयोजित इस ऐतिहासिक पदयात्रा की विशेषता यह है कि यह रामगढ़ कैंट एवं बोकारो होते हुए आगे बढ़ेगी। यह राजस्थान की राजधानी जयपुर नहीं जाएगी।

 

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ऐतिहासिक, अद्भुद श्री श्याम मनुहार महोत्सव में ठहर गये श्रद्धालु

August 26th, 2010 admin Posted in Important News | No Comments »

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खाटूश्यामजी : श्री बालाजी बाल परिवार मण्डल (ग्वालियर) द्वारा श्री श्याम मंदिर समिति (पंजी.) के सान्निध्य में ‘श्री श्याम मनुहार महोत्सव’ खाटूश्यामजी में 20-21-22 जुलाई 2010 को श्री श्याम मंदिर परिसर में आयोजित किया गया। श्री श्याम मनुहार महोत्सव का मुख्य उद्देश्य श्री श्याम मंदिर के नव निर्माण एवं विस्तार में आ रही अदालती अड़चनों को दूर कर भक्तों द्वारा श्री श्याम मंदिर का विस्तार कार्य शीघ्र आरम्भ करवाने हेतु श्री श्याम बाबा खाटू वाले से मनुहार करना था। 21 जुलाई को कानोडिया कोठी से रिक्त हुए स्थान पर आयोजित रात्रि जागरण एवं भजनों द्वारा श्री श्याम प्रभु की मनुहार करते हुए ‘श्री श्याम मनुहार महोत्सव’ के मुख्य संयोजक श्री पप्पू शर्मा ने हजारों दर्शनार्थियों के बीच कहा कि श्री श्याम बाबा के मंदिर का विस्तार करना भक्तों का कार्य है। श्री श्याम बाबा भक्तों के सभी कार्य बनाते हैं। अत: करोड़ों भक्तों की सुविधार्थ श्री श्याम बाबा कृपापूर्वक मंदिर विस्तार के कार्य में आ रही अदालती बाधाओं को समाप्त कर विस्तार कार्य के मार्ग को प्रशस्त करें।

 श्री श्याम मनुहार महोत्सव निर्धारित समयानुसार रात्रि 9 बजे श्री श्याम प्रभु की पवित्रा ज्योति के प्रज्ज्वलन के साथ आरम्भ हो गया। शास्त्रीय श्याम भजन गायक श्री संजय प्रभाकर ने राग शुद्धकल्याण पर आधरित श्री गणेश वन्दना के गायन से ‘श्री श्याम मनुहार महोत्सव’ का शुभारम्भ किया- ‘म्हे गणपत नै प्रथम मनावाँ, श्याम मनुहार महोत्सव माँही।’ श्री संजय प्रभाकर ने ‘श्री श्याम मनुहार महोत्सव’ के मंच से इतिहास रचते हुए पहलीबार शास्त्रीय राग-रागनियों पर आधरित भजनों का गायन किया। तत्पश्चात श्री श्याम भक्त कवि एवं गायक श्रद्धेय कुंजबिहारीजी  (वृंदावन) ने ‘राधरानी के नथ पर मोर नाचे, मोर नाचे चितचोर नाचे’ गीत गाकर उपस्थित भक्त समुदाय को रसविभोर कर दिया।

श्री श्याम मनुहार महोत्सव में मुख्य रूप से भजन गायन कर रहे प्रख्यात भजन गायक श्री पप्पू शर्मा (खाटूवाले) ने श्री श्याम मनुहार का उद्देश्य समझाते हुए महोत्सव का शीर्षक गीत ‘श्याम मनुहार महोत्सव है’ गाया तो भजन गी लय पर तालियाँ बजाते एवं नृत्य करते हुए हजारों श्याम भक्त-प्रेमियों’ ‘श्री श्याम मनुहार महोत्सव’ के स्वर में अपना स्वर भी सम्मिलित किया। श्री पप्पू शर्मा ने 3.30 घंटे से भी अधिक समय तक गायन किया। उन्होंने जब तक भजन गाया एकादशी की रात्रिा में दर्शनार्थी भक्तों की पंक्ति थम गई थी। मंच के सामने पंक्तिबद्ध हजारों दर्शनार्थी भक्तों ने उस समय श्री श्याम प्रभु के दर्शन करने से अच्छा मंदिर विस्तार की बाधओं को दूर करने हेतु श्री श्याम प्रभु से मुनहार कर रहे भक्तों के साथ मिलकर मनुहार के  भाव को अपना भरपूर समर्थन देना उचित समझा।

वृंदावन से आमंत्रिात साधिव पूर्णिमा, श्री मनोज शर्मा (ग्वालियर) एवं श्री दासमहेन्द्र निजामपुरिया, श्री कुमार भविष्य, कुमारी सपना शर्मा ने भी भजनों की अमृतवर्षा के माध्यम से ‘श्री श्याम मनुहार महोत्सव’ के भाव को पुष्ट किया। ‘श्री श्याम मनुहार महोत्सव’ के अन्तर्गत रात्रि जागरण एवं भजन-संकीर्तन का महोत्सव प्रात: 4 बजे के स्थान पर 6.30 बजे के बाद समाप्त हुआ।

‘श्री श्याम मनुहार माहेत्सव’ में श्री श्याम मंदिर समिति (पंजी.) के अध्यक्ष श्री राजेन्द्र सिंह चौहान, मंत्री श्री प्रताप सिंह चौहान एवं कोषाध्यक्ष श्री विक्रम सिंह चौहान ने अपना सान्निध्य प्रदान किया। सीकर जिला के कलैक्टर, अतिरिक्त जिला कलैक्टर एवं एडीशनल जिला कलैक्टर भी ‘श्री श्याम मनुहार महोत्सव’ में उपस्थित हुए। देश के विशिष्ट श्याम भक्तों यथा श्री पदमकुमार परसरामपुरिया, श्री बाबूलालजी दीवान, श्री रामकुमारजी, श्री शुभकरण करनानीजी, श्री रामनिवास गुप्ता, श्री विज्येंद्र जैन, श्री संजीव मित्तल, श्री सुरेश पंडित, श्री अजय शर्मा, श्री विजय शर्मा (श्री श्याम प्रेम मंडल, दिल्ली), श्री निर्मल खरकिया (कोलकाता), श्री दिनेश जिंदल आदि ने श्री श्याम मनुहार महोत्सव को अपना समर्थन दिया। इन सभी श्याम भक्तों को श्री श्याम मंदिर समिति (पंजी.) द्वारा प्रतीक चिन्ह, पुष्प माला एवं दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। श्री लाला सेठजी सहित अनेकों खाटूग्राम वासियों ने भी ‘रात्रि जागरण’ में अपनी उपस्थिति प्रदान की और ‘श्री श्याम मनुहार महोत्सव’ के भाव को प्रगाढ़ किया।

‘श्री श्याम मनुहार महोत्सव’ तीन चरणों में सम्पन्न हुआ। प्रथम चरण में 20 जुलाई को प्रात: 6 बजे रींगस स्थित परसरामपुरिया विश्राम भवन से एक विशाल श्री श्याम ध्वजा पदयात्रा का शुभारम्भ हुआ। श्री बालाजी बाल परिवार मण्डल (ग्वालियर) एवं श्री पप्पू शर्मा के नेतृत्व में आयोजित इस श्री श्याम ध्वजा पदयात्रा में श्री श्याम प्रभु के निमित्त 108 धवजाएँ, श्री हनुमानजी के निमित्त 5 धवजाएँ एवं पाँच देवों के निमित्त एक विशाल पचरंगी ध्वजा सम्मिलित की गई थी। ध्वजा यात्रा में 1500 पदयात्रियों ने हिस्सा लिया। पचरंगी ध्वजा लेकर श्री पप्पू शर्मा सबसे आगे चल रहे थे। श्री बालाजी बाल परिवार मण्डल (ग्वालियर) के श्री संजीव गर्ग के मार्गदर्शन में सभी पदयात्री ‘ओम श्री श्यामदेवाय नम:’ महामंत्र का जाप करते हुए खाटूश्यामजी की ओर बढते जा रहे थे। तभी एक चमत्कारित घटना सामने आई, ध्वजायात्रा के साथ-साथ तोतों का एक विशाल झुंड ध्वजा पथ के दोनों ओर लहरा रहे नीम के पेड़ों के उपर आधे रास्ते तक उड़ते हुए चले। सभी श्याम भक्तों ने इस घटना को एक शुभ संकेत के रूप में देखा।

10 किमी पर श्री श्याम धवजा पदयात्रा ने विश्राम हेतु पड़ाव डाला। तभी आकाश में मंडरा रहे काले बादलों ने बरसना आरम्भ कर दिया। परन्तु पदयात्रिायों ने भीषण वर्षा में भी पदयात्रा को अनवरत रखा। इसके पश्चात खाटूश्यामजी तक वर्षा होती रही। तोरणद्वार के समीप से सभी पदयात्री एकसाथ श्री श्याम मंदिर की ओर बढ़े। पचरंगी धवता लिये श्री पप्पू शर्माजी एवं मोरछड़ी लहराते हुए श्री संजीव गर्गजी पदयात्रियों का नेतृत्व करते हुए बढ़ रहे थे। सभी धवजाएँ अपने निर्धारित स्थानों पर ‘ओम श्री श्यामदेवाय नम:’ महामंत्र के जाप  के साथ फहरा दी गईं।

21 जुलाई को दोपहर दो बजे श्री पप्पू शर्मा जी के निवास ‘माँ’ से श्री बालाजी बाल परिवार मण्डल (ग्वालियर) के सदस्यों के साथ एक शोभायात्रा दोपहर 2 बजे श्री श्याम मंदिर की ओर प्रस्थित हुई। इस शोभायात्रा में श्री श्याम बाबा के श्रंगार हेतु पोशाक, चाँदी का घंटा, चाँदी की गदा आदि श्री श्याम प्रभु को समर्पित की गई। संध्या समय गुलाबी पोषाक में श्री श्याम प्रभु का श्रंगार अत्यंत ही मनमोहक लग रहा था।

‘श्री श्याम मनुहार महोत्सव’ के तृतीय चरण में 22 जुलाई को महोत्सव स्थल पर विशाल भंडारा आयोजित किया गया। हजारों श्याम प्रेमियों ने बैठकर बारी-बारी से दाल, बाटी, चूर्मा, रायता आदि का प्रसाद पाया।

‘श्री श्याम मनुहार महोत्सव’ के तीन दिवसीय महाआयोजन ने देश के प्रत्येक श्याम प्रेमी-भक्तों को आश्वस्त किया कि श्री श्याम बाबा करोड़ों भक्तों की मनुहार को अवश्य सुनेंगे ताकि श्री श्याम मंदिर के समुचित विस्तार का मार्ग शीघ्र प्रशस्त हो सके।

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शीघ्र ही पूरी होगी मनुहार, भक्तों को है पूर्ण विश्वास

August 26th, 2010 admin Posted in Important News | No Comments »

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खाटूश्यामजी : श्री बालाजी बाल परिवार मण्डल (ग्वालियर) द्वारा 21 जुलाई को खाटूधाम में आयोजित श्री श्याम मनुहार महोत्सव में श्री श्याम बाबा से की गई ‘मनुहार’ शीघ्र ही पूर्री होगी, ऐसा देश के करोड़ों श्याम भक्तों को पूर्ण विश्वास है। इतिहासकार श्री देवेन्द्र कुमार शर्मा के अनुसार खाटूश्यामजी के इतिहास की यह पहली घटना है जिसमें श्री श्याम प्रभु मनुहार महोत्सव के संयोजक श्री पप्पू शर्मा ने हजारों दर्शनार्थियों को महोत्सव का उद्देश्य समझाते हुए कहा कि ”क्या कभी भगवान ने अपना मंदिर बनाया है? भगवान का मंदिर तो सदैव भगवान के भक्तों ने ही बनाया है। अत: श्री श्याम मंदिर का विस्तार करना भक्तों का कार्य है, न कि भगवान का और श्री श्याम बाबा अपने भक्तों के सभी कार्य बनाते हैं, चुँकि मंदिर का विस्तार करना भक्तों का कार्य है अत: हम सभी श्री श्याम बाबा से मनुहार करने हेतु एकत्र हुए हैं कि प्रभु अप भक्तों के इस कार्य को भी पूरा करने की कृपा करें।” महोत्सव के पश्चात देश के श्याम भक्तों के बीच हुई चर्चाओं से यह बात निकलकर सामने आई है कि भक्तों के अन्य कार्यों की ही तरह श्याम बाबा शीघ्र ही अपने मंदिर के विस्तार के कार्य में आ रही अदालती बाधा को भी दूर करेंगे, जिससे भक्तों द्वारा उनके मंदिर के विस्तार का कार्य निर्विघ्न सम्भव हो पाएगा।

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शास्त्रीय संगीत पद्धति से पद गाकर श्याम प्रभु को रिझाने से कुछ वर्षों में खाटूश्यामजी में भी वृंदावन जैसी कृपा बरसेगी : कुंजबिहारीजी

August 26th, 2010 admin Posted in Important News | No Comments »

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खाटूश्यामजी : श्री श्याम बाबा के धम खाटूश्यामजी में पिछले अप्रैल महिने की शुक्ल एकादशी से हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की नि:शुल्क कार्यशाला कार्यरत है। इस कार्यशाला का शुभारम्भ शास्त्रीय गायक श्री संजय प्रभाकर ने श्री श्याम प्रभु की प्रेरणा से किया है। संगीत कार्यशाला में शास्त्रीय संगीत के जिज्ञासुओं को हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के बारे बताया जाता है। संगीत कार्यशाला को अन्य श्याम भक्तों का सहयोग भी मिल रहा है। श्री श्रवण कुमार अग्रवाल (दिल्ली)] श्री पप्पू शर्मा (खाटूश्यामजी) एवं श्री श्याम सेवा मण्डल (कोलकाता) आदि ने शास्त्रीय संगीत की कार्यशाला के प्रयासों को अपना सहयोग प्रदान किया है।

21 जुलाई 2010 को शुक्ल एकादशी के दिन वरिष्ठ श्याम भक्त कवि एवं गायक श्रद्धेय कुँजबिहारीजी (वृंदावन) शास्त्रीय संगीत की कार्यशाला को अपना आशीर्वाद देने आए। उन्होंने कार्यशाला में राग भीमपलासी का अध्ययन कर रहे संगीत ज्ञिासुओं से मिलकर श्री संजय प्रभाकर से कहा-

”यह कार्य पहले ही आरम्भ हो जाना चाहिये था। शास्त्रीय संगीत भगवान को प्रसन्न करने का सर्वोत्तम माध्यम है। शास्त्रीय संगीत के रागों पर आधारित भक्ति पद गाने की यह पद्धति भारतवर्ष के महान संतों ने आरम्भ की थी। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है श्रीधाम वृंदावन में पूजनीय संतों द्वारा शास्त्रीय संगीत की राग-रागनियों पर पद गायन से भगवान को प्रगट करना है। वृंदावन धाम के श्री बाँकेबिहारीजी संगीत गुरु बाबा हरिदास के द्वारा प्रगट, साक्षात मूर्ति है। श्रीधाम वृंदावन में संतों द्वारा भक्ति-भाव से भजन-संकीर्तन करके 7 प्रगट मूर्तियों को अपनी सेवा से प्रसन्न कर भावुक भक्तों को भगवान के चरणों से लगाया।

खाटूधाम में श्याम भक्त बाबा को रिझाने का कार्य सैकड़ों वर्षों से कर रहे हैं। भजन-कीर्तनों में लोक साहित्यक भक्ति पद गाकर बाबा को रिझाने का निरंतर प्रयास खाटूधाम में हो रहा है। अब शास्त्रीय संगीत द्वारा भक्त कवियों की रचनाएँ तात्कालिक गायक गाकर भगवान को रिझाने का प्रयास करेंगे तो कुछ वर्षों में भगवान श्यामसुन्दर के वृंदावन धाम जैसे ही खाटूधाम में भी श्याम बाबा की कृपा निश्चय ही बरसेगी।”

 

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श्री श्याम अखण्ड ज्योति पाठ के आधार कहे जाने वाले “भारतसार” ग्रंथ में कोई “सार” नजर नहीं आ रहा है

August 26th, 2010 admin Posted in Important News | No Comments »

खाटूश्यामजी : श्री श्याम संसार पिछले कुछ महिनों से श्री श्याम बाबा की कथा पर शोधरत है। जैसा कि पिछले अंक में बताया गया था कि श्री श्याम संसार के सम्पादक को ‘भारतसार’ नामक ग्रंथ दिल्ली के पीतमपुरा में ही मिल गया है। जुलाई की एकादशी को ‘भारतसार’ ग्रंथ का प्रदर्शन खाटूश्यामजी में किया गया था। श्री देवेन्द्र कुमार शर्मा ने ‘भारतसार ग्रंथ’ जो जर-जर अवस्था में था को एक महिने हेतु अपने पास रख लिया था। श्री देवेन्द्र कुमार शर्माजी (इतिहासकार) ने श्री श्याम संसार को बताया- ”श्री बर्बरीक चरित्र पर आधरित कुछ अंश मैंने इस ग्रंथ में पढ़ा, जिसका मेल हमारे प्राचीन ग्रंथों महाभारत, स्कधपुराण एवं श्रीमद्भागवत के अनुरूप नहीं है। प्रस्तुत ग्रंथ में शुरू में ही आदि पर्व खण्ड में वीर बर्बरीक का जन्म हिडिम्बा के संसर्ग से हुआ बताया गया है। इतना ही नहीं भारतसार के पृष्ठ 24 में वर्णित है कि हिडिम्बा ने दो पुत्रों को जन्म दिया था जिसमें पहला घटोत्कच एवं दूसरा बर्बरीक था, जो कि बहुत हास्यास्पद एवं आश्चर्यजनक है। ऐसा वर्णन महाभारत में कहीं भी नहीं मिलता है।

इसी ग्रंथ के भीष्म पर्व में वर्णित है कि श्रीकृष्ण ने बर्बरीक से रणभूमि में प्रथम आहुति देने हेतु शीश मांगा तो वीर बर्बरीक ने अपने जटाजूट को पकड़ा और अपना शीश काटकर श्रीकृष्ण को दे दिया अत्यंत ही भ्रामक है।

अहलवती से भीमसेन के विवाह का उल्लेख इस ग्रंथ में कहीं भी नहीं है, और ना ही अहलवती नामक किसी अन्य पात्र ही इस ग्रंथ में प्रकाशित है।

भारतसार के पृष्ठ संख्या 99 पर घटोत्कच के एक पुत्र अनन्तपर्वा का उल्लेख मिलता है जो महाभारत के अनुसार नहीं है।

महाभारत के पश्चात पाण्डवों का बर्बरीक के पास पहुँचना और श्रीकृष्ण द्वारा कलियुग में पूजे जाने का वृतान्त भी इस पुस्तक में नहीं है।

युद्ध नियमों के अनुसार शत्रु सेना पर रात्रि के समय प्रहार करना नीति विरुद्ध था, फिर भी घटोत्कच द्वारा कर्ण पर रात्रि में प्रहार करना भारतसार के पृष्ठ संख्या 277 पर दर्शाया गया है, जोकि महाभारत से मेल नहीं खाता है।

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि भारतसार किसी व्यक्ति विशेष द्वारा लिखा गया ऐसा ग्रंथ है जिसमें कुछ प्राचीन ग्रंथों से लेकर तोड़-मरोड़ कर लिखी गईं सुनी-सुनाई बातें व मनगढ़ंत घटनाएँ वर्णित हैं। ऐसी घटनाओं को कुछ तथाकथित श्याम भक्तों ने भी अपनी भजन रचनाओं में समावेश कर डाला है। भारतसार में संस्कृत श्लोकों का कहीं भी समावेश नहीं किया गया है।

निष्कर्षत: यही कहा जा सकता है कि भारतसार एक सारहीन पुस्तक है जिसका अधययन भ्रांतिपूर्ण है। इसमें वर्णित घटनाओं का किसी भी प्रामाणिक ग्रंथ से मेल नहीं खाता है, अत: यह सारहीन है।

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सकल अशिक्षा को मिटा सकती है ‘एकल’/ दिल्ली में बाबा सत्यनारायण मौर्या ने किया जनजागरण

August 26th, 2010 admin Posted in Important News | No Comments »

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दिल्ली : रविन्द्रनाथ ठाकुर ने लिखा था- ‘जोदी तोर डाक शूने केउ ना आशे तौबे एकला चौलो रे’, इसी सिद्धांत के अनुसार भारत लोक शिक्षा परिषद् (पंजी) ने 63वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर भारत के सुदूर ग्रामीण, अंदरूणी एवं वनवासी क्षेत्रों में शिक्षा के प्रसार एवं प्रचार हेतु शहरी लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया। मुख्य रूप से आमंत्रित विश्वविख्यात कवि, गायक, चित्रकार एवं जन-जागरण के अग्रदूत बाबा सत्यनारायण मौर्या ने भारत माता की आरती शीर्षक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। उन्होंने अपनी उत्कृष्ट वक्तृत्व कला एवं अन्यतम प्रस्तुतिकरण के माधयम से महाराजा इंजीनियरिंग कॉलेज के सभागार में उपस्थित श्रोताओं को देश की वर्तमान दशा से अवगत कराते हुए देश के लिये कुछ करने का जोश भर दिया। उन्होंने अपनी प्रस्तुति से यह सिद्ध कर दिया कि जिस प्रकार वह एक मंच पर एक ही समय में संगीत, कविता, सम्भाषण एवं चित्रकारी आदि विधाओं का सफल प्रदर्शन एक साथ कर रहे हैं, उसी प्राकर प्रत्येक व्यक्ति अपनी दिनचर्या का पालन करते हुए देश व समाज के लिये भी कुछ न कुछ अवश्य कर सकता है। बाबा सत्यनारायण मौर्या ने अपने अद्भुद कार्यक्रम द्वारा समाज के आम एवं खास लोगों को एक विद्यालय योजना हेतु हर प्रकार का सहयोग देने हेतु तत्पर रहने का संदेश भी दिया।

कार्यक्रम का संचालन प्रख्यात समाजसेवी एवं राष्ट्रभक्त श्री जगदीश मित्तलजी ने किया। उन्होंने कहा कि एकल विद्यालय देश के सभी राज्यों के 180 जिलों में 35000 विद्यालय कार्यरत हैं जिनसे 27 लाख लोगों ने शिक्षा का लाभ पाया है। श्री जगदीश मित्तलजी ने कहा कि 2013 तक सम्पूर्ण भारत में एक लाख एकल विद्यालय खोलने की योजना है।

श्री श्याम संसार का मानना है कि भारत लोक शिक्षा परिषद् (पंजी) द्वारा संचालित ‘एकल विद्यालय योजना’ समाज के समर्थ एवं सक्षम लोगों के सहयोग से भारत में अशिक्षा के प्रतिशत को शूण्य करने की दिशा में बहुत बड़ी भूमिका निभाने को आतुर है। सर्वशिक्षा का यह महाअभियान इस उक्ति को सार्थक कर सकता है कि ‘सकल अशिक्षा को मिटा सकती है विद्यालय योजना एकल’।

आओ सुदूर गाँवों को उन्नत बनाएँ

वनवासी समाज में शिक्षा का अलख जगाएँ

प्राथमिक शिक्षा, आरोग्य शिक्षा

ग्राम विकास शिक्षा एवं स्वाभिमान शिक्षा।

से भारत का जन-मन हर्षाएँ!

कार्यक्रम में एकल विद्यालय योजना के लिये मदद करने हेतु पश्चिमी व उत्तरी दिल्ली चैप्टर के नवनियुक्त पदाधिकारियों की घोषणा एवं उनका सम्मान किया गया। पश्चिमी दिल्ली के नवनियुक्त पदाधिकारी- संरकक्षकगण : श्री अमृत सिंघला, श्री जयकिशन गुप्ता, श्री गजानन्द साँवरिया, श्री संजीव टेकरीवाल, परामार्शदाता : श्री एस. एन. बंसल, श्री विज्येन्द्र जैन, श्री एस. के. चौधरी, श्री सीताराम गुप्ता, अध्यक्ष : श्रीरामनिवास गुप्ता, उपाध्यक्ष : श्री श्रवण अग्रवाल, श्री एस. के. चौधरी, श्री अमृत गोयल, श्री अरुण गुप्ता, महामंत्री : श्री टीकम सर्राफ, मंत्री : श्री सन्तराम गोयल, श्री कर्मवीर सोलंकी, श्री मनमोहन अग्रवाल, श्री जितेन्द्र गुप्ता एवं कोषाध्यक्ष श्री अरुण गोयल हैं।

उत्तरी दिल्ली के नवनियुक्त पदाधिकारी- संरकक्षकगण : श्री प्रेमसागर गोयल, श्री सुरेन्द्रपाल गुप्ता, श्री शिवदत्त गुप्ता, श्री चाँदकिशोर अग्रवाल, श्री बलवन्त राय, अध्यक्ष : श्री नरेन्द्र गोयल, उपाध्यक्ष : श्री राजेन्द्र गर्ग, श्री प्रदीप गुप्ता, श्री रामलाल अग्रवाल, श्री उमेश गुप्ता, महामंत्री : श्री गोपाल गोयल, मंत्री : श्री श्रीमती अनीमा मुकीम, श्री रवि मित्तल, श्री वेद प्रकाश गुप्ता, श्री विजय गुप्ता एवं कोषाध्यक्ष श्री राजकुमार मित्तल हैं।

एकल विद्यालय अभियान योजना कार्यक्रम में श्री वासुदेव अग्रवाल ने अपना सान्निध्य प्रदान किया। कार्यक्रम में श्री नन्दकिशोर गर्ग, श्री पी. एल. चतुर्वेदी, श्री वी. पी. अग्रवाल, श्री शंकर मित्तल, श्री रमेश अग्रवाल, श्री महेन्द्र गुप्ता, श्री सत्यनारायण बन्धु एवं प्रो. श्री मंजुश्री भी उपस्थिति थे। इनके अतिरिक्त प्रख्यात राष्ट्रीय कवि श्री राजेश ‘चेतन’, बाबा के विशेष सहयोगी श्री राजेश ‘पथिक/नीरव’, श्री संजय प्रभाकर ने भी अपनी उपस्थिति प्रदान की।

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श्री श्याम मंदिर में पीछे की ओर निकास द्वार खोला गया

August 26th, 2010 admin Posted in Important News | No Comments »

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खाटूश्यामजी : श्री श्याम बाबा खाटू वाले के मंदिर में प्रत्येक शुक्ल एकादशी एवं छुट्टी के दिनों में जिस प्रकार से भक्तों की भीड़ बढ़ती जा रही है, ऐसे में भक्तों के निकास हेतु श्री श्याम मंदिर समिति द्वारा हर बार नये-नये प्रयोग किये जाते हैं। 22 जून 2010 को भक्तों के निकास के लिये श्री श्याम मंदिर में स्थित शिवजी के मंदिर के सामने पीछे की ओर जाने के लिये एक नया निकास द्वार खोला गया। इस निकास द्वार के खोलने से प्राचीन श्याम मंदिर में सीधे प्रवेश का मार्ग भी खुल गया। आम श्याम भक्तों ने इस निकास द्वार को खोलने हेतु श्री श्याम मंदिर समिति का साधुवाद दिया। ज्ञातव्य है कि मंदिर में वीआईपी दर्शन को दो भागों में पहले ही विभक्त किया जा चुका है। इस कारण अब वीआईपी दर्शन हेतु लम्बी कतार कम हो गई है।

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गुढ़ा के श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में रात्रि जागरण

August 26th, 2010 admin Posted in Important News | No Comments »

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गुढ़ा-पौंख : 24 जुलाई 2010 को झुन्झुनूँ जिला के गुढ़ा कस्बे में स्थित श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर के प्रांगण में रात्रि जागरण एवं भजन-संकीर्तन आयोजित किया गया। गाँव किशारेपुरा के श्री भगवती प्रसाद शर्मा के सान्निध्य में आयोजित इस भजनोत्सव में श्री संजय प्रभाकर, स्थानीय ख्याति प्राप्त ढ़ोलक वादक श्री सलीम, श्री परमेश्वर एवं श्री कालू शर्मा ने भजन गाये। रात्रि 11 बजे आरम्भ हुए इस रात्रि जागरण में शास्त्रीय भजन गायक श्री संजय प्रभाकर ने राग-रागनियों पर आधरित स्व. रामशंकर मिश्र पंकज (देवघर), श्री सोम ठाकुर, ब्रह्मानंद एवं स्वरचित अनेक भजन गाये। प्रात: आरती से पूर्व गोधूली बेला में श्री संजय प्रभाकर ने राग भैरव में तीनताल एवं इसी राग पर आधरित श्री सोमठाकुरजी रचित ‘शिव सनातन पुरुष जय-जय’ भक्ति पद गाया। शास्त्रीय गायक श्री भगवती प्रसाद शर्मा ने ‘काहू संग प्रीति’, ‘मन मूरख मानुष तन की कदर न जानी’, ‘दम निकल जाये कब आदमी का, क्या भरोसा है इस जिन्दगी का’ श्री कालू शर्मा ने ‘साँवरा आज्यो म्हारे देस’ श्री सलीम ने ‘तू कांई जाणे पीड़ पराई’ (राग देस) आदि भजनों का गायन किया। जागरण में राजस्थान के प्रख्यात चित्रकार श्री शंकरलालजी भी उपस्थित थे।

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