देवघर के बाबा मंदिर के गर्भगृह में दूसरा द्वार पहले से ही है, उसे बड़ा करने की आवश्यक्ता है
देवघर : जब भी सावन मेला आने वाला होता है, शिव भक्त काँवड़ियों की बढ़ती संख्या झारखंड स्थित बाबा बैजनाथ मंदिर के गर्भगृह में दूसरे द्वार की चर्चा पर विचार आरम्भ हो जाता है। कोई बाबा मंदिर के गर्भगृह की पश्चिम ओर द्वार खोलने की बात कहता है तो कोई मंदिर प्रांगण के अंदर सुरंग खोदने की सलाह देता है। कहा जाता है कि भारत समेत अमेरिका, यूरोप और जापान के अनेकों इंजिनियरों ने बाबा मंदिर में पश्चिम की ओर दूसरा द्वार खोलने हेतु गर्भगृह का वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया। परन्तु दूसरा द्वार खोलने हेतु किसी ने भी छेनी-हथोड़ी चलाने का दुस्साहस कभी नहीं किया। क्योंकि स्थानीय निवासियों समेत वैज्ञानिकों को यह अंदेशा है कि गर्भगृह में कहीं भी सुराग किया जाएगा तो समूचा मंदिर ताश के पत्तो की तरह ढ़ह जाएगा। परन्तु श्री श्याम संसार का मानना है कि मंदिर के गर्भगृह में दूसरा द्वार पहले से ही विद्यमान है, उसे मात्र बड़ा करने की आवश्यक्ता है।
सम्पादक संजय प्रभाकर ने गर्भगृह में जहाँ पर नया द्वार खोलने की बात की है वह पश्चिम की ओर नहीं अपितु उत्तर की ओर है। उन्होंने पाया है कि बाबा मंदिर के गर्भगृह में दूसरा द्वार तो विश्वकर्माजी ने पहले से ही छोड़ा हुआ है, बस उसे बड़ा करने की आवश्यक्ता है। वस्तुत: विश्वकर्माजी ने शिव मंदिर निर्माण करते समय एक मुख्य द्वार के अतिरिक्त जलाभिषेक का जल निकासी हेतु उत्तर दिशा की ओर एक सुराख भी किया था। यही है बाबा मंदिर में भगवान विश्वकर्माजी द्वारा बनाया गया दूसरा निकास द्वार। देवघर निवासियों एवं वैज्ञानिकों से श्री श्याम संसार के सम्पादक संजय प्रभाकर अपील करते हैं कि भगवान विश्वकर्माजी द्वारा निर्मित इस जल निकासी के छोटे से सुराख को बड़ा कर दिया जाय। इसमें मनिक भी संदेह नहीं कि बाबा मंदिर के गर्भगृह में पश्चिम, दक्षिण कहीं भी दीवार को काटकर द्वार नहीं खोला जा सकता है। पश्चिम की ओर गर्भगृह की दीवार को तोड़ने से ध्ररना देने वालों को अपार कष्ठ होगा। दक्षिण की आरे द्वार वास्तुशास्त्र के अनुरूप नहीं होगा। अत: उत्तर की ओर जहाँ से जलाभिषेक का जल निकास होता है वहीं एकमात्र स्थान है जहाँ से गर्भगृह में दूसरा द्वार खोला जा सकता है। इस पर किसी को कोई आपत्ति भी नहीं हो सकती है क्योंकि वहाँ पहले से ही एक छिद्र है। श्री श्याम संसार द्वारा करोड़ों शिव भक्तों के कल्याणार्थ यह लेख एक सुझाव मात्र है, इसे मानने और इस पर अमल करने का अधिकार जिला प्रशासन, पंडा समाज, नागरिक भक्त एवं मंदिर समिति को है।
प्रस्तुति : श्री नवीनकृष्ण, एडवोकेट, पत्रकार, देवघर, झारखंड
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