शास्त्रीय संगीत पद्धति से पद गाकर श्याम प्रभु को रिझाने से कुछ वर्षों में खाटूश्यामजी में भी वृंदावन जैसी कृपा बरसेगी : कुंजबिहारीजी

खाटूश्यामजी : श्री श्याम बाबा के धम खाटूश्यामजी में पिछले अप्रैल महिने की शुक्ल एकादशी से हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की नि:शुल्क कार्यशाला कार्यरत है। इस कार्यशाला का शुभारम्भ शास्त्रीय गायक श्री संजय प्रभाकर ने श्री श्याम प्रभु की प्रेरणा से किया है। संगीत कार्यशाला में शास्त्रीय संगीत के जिज्ञासुओं को हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के बारे बताया जाता है। संगीत कार्यशाला को अन्य श्याम भक्तों का सहयोग भी मिल रहा है। श्री श्रवण कुमार अग्रवाल (दिल्ली)] श्री पप्पू शर्मा (खाटूश्यामजी) एवं श्री श्याम सेवा मण्डल (कोलकाता) आदि ने शास्त्रीय संगीत की कार्यशाला के प्रयासों को अपना सहयोग प्रदान किया है।
21 जुलाई 2010 को शुक्ल एकादशी के दिन वरिष्ठ श्याम भक्त कवि एवं गायक श्रद्धेय कुँजबिहारीजी (वृंदावन) शास्त्रीय संगीत की कार्यशाला को अपना आशीर्वाद देने आए। उन्होंने कार्यशाला में राग भीमपलासी का अध्ययन कर रहे संगीत ज्ञिासुओं से मिलकर श्री संजय प्रभाकर से कहा-
”यह कार्य पहले ही आरम्भ हो जाना चाहिये था। शास्त्रीय संगीत भगवान को प्रसन्न करने का सर्वोत्तम माध्यम है। शास्त्रीय संगीत के रागों पर आधारित भक्ति पद गाने की यह पद्धति भारतवर्ष के महान संतों ने आरम्भ की थी। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है श्रीधाम वृंदावन में पूजनीय संतों द्वारा शास्त्रीय संगीत की राग-रागनियों पर पद गायन से भगवान को प्रगट करना है। वृंदावन धाम के श्री बाँकेबिहारीजी संगीत गुरु बाबा हरिदास के द्वारा प्रगट, साक्षात मूर्ति है। श्रीधाम वृंदावन में संतों द्वारा भक्ति-भाव से भजन-संकीर्तन करके 7 प्रगट मूर्तियों को अपनी सेवा से प्रसन्न कर भावुक भक्तों को भगवान के चरणों से लगाया।
खाटूधाम में श्याम भक्त बाबा को रिझाने का कार्य सैकड़ों वर्षों से कर रहे हैं। भजन-कीर्तनों में लोक साहित्यक भक्ति पद गाकर बाबा को रिझाने का निरंतर प्रयास खाटूधाम में हो रहा है। अब शास्त्रीय संगीत द्वारा भक्त कवियों की रचनाएँ तात्कालिक गायक गाकर भगवान को रिझाने का प्रयास करेंगे तो कुछ वर्षों में भगवान श्यामसुन्दर के वृंदावन धाम जैसे ही खाटूधाम में भी श्याम बाबा की कृपा निश्चय ही बरसेगी।”
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