श्री गणेशाय नम: :: श्याम प्रभु खाटू वाले का मुख्य समाचार पत्र ::


देवघर के बाबा मंदिर के गर्भगृह में दूसरा द्वार पहले से ही है, उसे बड़ा करने की आवश्यक्ता है

August 17th, 2010 admin Posted in Important News | No Comments »

देवघर : जब भी सावन मेला आने वाला होता है, शिव भक्त काँवड़ियों की बढ़ती संख्या झारखंड स्थित बाबा बैजनाथ मंदिर के गर्भगृह में दूसरे द्वार की चर्चा पर विचार आरम्भ हो जाता है। कोई बाबा मंदिर के गर्भगृह की पश्चिम ओर द्वार खोलने की बात कहता है तो कोई मंदिर प्रांगण के अंदर सुरंग खोदने की सलाह देता है। कहा जाता है कि भारत समेत अमेरिका, यूरोप और जापान के अनेकों इंजिनियरों ने बाबा मंदिर में पश्चिम की ओर दूसरा द्वार खोलने हेतु गर्भगृह का वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया। परन्तु दूसरा द्वार खोलने हेतु किसी ने भी छेनी-हथोड़ी चलाने का दुस्साहस कभी नहीं किया। क्योंकि स्थानीय निवासियों समेत वैज्ञानिकों को यह अंदेशा है कि गर्भगृह में कहीं भी सुराग किया जाएगा तो समूचा मंदिर ताश के पत्तो की तरह ढ़ह जाएगा। परन्तु श्री श्याम संसार का मानना है कि मंदिर के गर्भगृह में दूसरा द्वार पहले से ही विद्यमान है, उसे मात्र बड़ा करने की आवश्यक्ता है। 

सम्पादक संजय प्रभाकर ने गर्भगृह में जहाँ पर नया द्वार खोलने की बात की है वह पश्चिम की ओर नहीं अपितु उत्तर की ओर है। उन्होंने पाया है कि बाबा मंदिर के गर्भगृह में दूसरा द्वार तो विश्वकर्माजी ने पहले से ही छोड़ा हुआ है, बस उसे बड़ा करने की आवश्यक्ता है। वस्तुत: विश्वकर्माजी ने शिव मंदिर निर्माण करते समय एक मुख्य द्वार के अतिरिक्त जलाभिषेक का जल निकासी हेतु उत्तर दिशा की ओर एक सुराख भी किया था। यही है बाबा मंदिर में भगवान विश्वकर्माजी द्वारा बनाया गया दूसरा निकास द्वार। देवघर निवासियों एवं वैज्ञानिकों से श्री श्याम संसार के सम्पादक संजय प्रभाकर अपील करते हैं कि भगवान विश्वकर्माजी द्वारा निर्मित इस जल निकासी के छोटे से सुराख को बड़ा कर दिया जाय। इसमें मनिक भी संदेह नहीं कि बाबा मंदिर के गर्भगृह में पश्चिम, दक्षिण कहीं भी दीवार को काटकर द्वार नहीं खोला जा सकता है। पश्चिम की ओर गर्भगृह की दीवार को तोड़ने से ध्ररना देने वालों को अपार कष्ठ होगा। दक्षिण की आरे द्वार वास्तुशास्त्र के अनुरूप नहीं होगा। अत: उत्तर की ओर जहाँ से जलाभिषेक का जल निकास होता है वहीं एकमात्र स्थान है जहाँ से गर्भगृह में दूसरा द्वार खोला जा सकता है। इस पर किसी को कोई आपत्ति भी नहीं हो सकती है क्योंकि वहाँ पहले से ही एक छिद्र है। श्री श्याम संसार द्वारा करोड़ों शिव भक्तों के कल्याणार्थ यह लेख एक सुझाव मात्र है, इसे मानने और इस पर अमल करने का अधिकार जिला प्रशासन, पंडा समाज, नागरिक भक्त एवं मंदिर समिति को है।

प्रस्तुति : श्री नवीनकृष्ण, एडवोकेट, पत्रकार, देवघर, झारखंड

 

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Importent Notes About Free Workshop On Indian Classical Music In Khatudham

May 8th, 2010 admin Posted in Important News | No Comments »

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रामसेतु ऐतिहासिक राष्ट्रीय धरोहर एवं रामेश्वरम् ‘पवित्र तीर्थ नगर’ घोषित हो

September 13th, 2009 admin Posted in Important News | No Comments »

दिल्ली : ‘राम सेतु रक्षा मंच’ ने राजधनी दिल्ली के रोहिणी क्षेत्र में स्थित विशाल स्वर्ण जयंती पार्क में 30 दिसम्बर 2007 को एक महा विशाल रैली का सफलतम आयोजन किया। 15 लाख से भी अध्कि राम भक्त रैली समापन तक पार्क में उपस्थित थे, जबकि इससे भी अधिक राम भक्त रैली स्थल तक समय पर इसलिए नहीं पहुँच सके, क्योंकि इस दिन दिल्ली पुलीस ने किसी भी अनहोनी से बचने के लिए गहन सुरक्षा घेरे बना रखे थे। रैली में बनाए गए तीन अलग-अलग विशाल मंचों पर साधु-संतों, मुख्य वक्ताओं, अतिथियों, जगद्गुरु शंकराचार्यों, हिन्दू संगठनों के मुख्य पदाधिकारियों एवं तीसरे मंच पर विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों एवं राजनेताओं को उपस्थित देखा गया। रैली में आम जनता के माधयम से वर्तमान यूपीए सरकार तक निम्न बातों को पहुँचाने का सफल प्रयाय किया गया-

1. हम संकल्प करते हैं कि श्रीराम सेतु का कदापि नष्ट नहीं होने देंगे।

2. वाल्मीकी रामायण के 22वें सर्ग में श्रीराम सेतु के निर्माण की वैज्ञानिक प्रक्रिया और सामग्री का विशद विवरण है।

3. भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री रामेश्वर ज्योतिर्लिंग का मूल नाम सेतूबंध् रामेश्वर है।

5.  रामसेतु की प्रामाणिकता का एक आधार यह भी है रामनाथपुरम के 1972 में जारी किए गए एक सरकारी गजट के अनुसार श्रीराम सेतु को ‘रामार पालम्’ अर्थात रामसेतु लिखा गया है और वहाँ के राजा का ‘सेतुपति’ की उपाध् दी जाती है।

6. भगवान श्रीराम के अस्तित्व को नकारने का तात्पर्य आदि तीर्थंकर भगवान रिषभदेव, भगवान बुद्द तथा भगवान श्रीराम के पुत्राद्वय लव एवं कुश द्वारा प्रवर्तित बेदी और सोढ़ी वंश में अवतीर्ण हुए गुरुनानकदेवजी एवं गुरुगोविन्द सिंहजी, महाराणा प्रताप तथा छत्रपति शिवाजी महाराज के अस्तित्व को भी अस्विकार करना होगा।

7. श्रीराम सेतु का विध्वंस भारत की अस्मिता और आसथा का विध्वंस है।

8. केन्द्र सरकार का वकतव्य है कि वह श्रीरामसेतु को तोड़कर चैनल (एसएससीपी) बनाने के अपने अविवेकपूर्ण निर्णय को तुरन्त रद्द करने की घोषणा करे और भगवान श्रीराम को अनैतिहासिक और काल्पिनिक बताने वाले अपने आधिकारिक शपथ पत्र के लिए राष्ट्र से क्षमायाचना करे।

9. सरकार को चाहिये कि रामेश्वरम समुद्र में स्थित श्रीरामसेतु को ऐतिहासिक संरक्षित ऐतिहासिक राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया करे।

10. रामेश्वरम् को पवित्र तीर्थ नगर घोषित करना चाहिये जिससे श्रीराम सेतु की सुरक्षा पर भविष्य में किसी प्रकार का संकट न आए।

11: यदि वर्तमान सरकार ने श्रीराम सेतु को तोड़ने पर कायम रही तो विश्वव्यापी उग्र आन्दोलन किया जाएगा। रैली में मंचासीन हिन्दू नेता श्री प्रवीण तोगड़िया, साध्वि रितंभरा एवं श्री अशोक सिंहल ने उपस्थित जन समुद्र से रामसेतु की रक्षार्थ लाखों मुट्ठियाँ तनवाकर संकल्प लिया कि सभी तन-मन-धन से रामसेतु की रक्षा करेंगे।

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बंगला भाषा में प्रथम श्याम भजन, मित्र एवं सेवा मंडलों में गाया गया : संजय प्रभाकर ने रचा इतिहास

January 8th, 2009 admin Posted in Important News, Uncategorized | No Comments »

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खाटूधाम : श्री श्याम बाबा खाटू वाले कि महिमा अपरम्पार है। जैसे-जैसे युग बदलता है, श्याम बाबा के भजन गायकों और भजन रचने वाले भी नये-नये आ जाते हैं। ऐसे ही कवि व गायक के रूप में संजय प्रभाकर भी उभर रहे हैं। पश्चिम बंगाल श्याम बाबा खाटू वाले के भक्तों, गायकों और कवियों का गढ मान जाता रहा है। किन्तु इतिहास में पहलीबार ऐसा हुआ है कि बंगला भाषा में श्याम बाबा खाटू वाले का भजन लिखा एवं गाया गया है। साऊथ कोलकाता के श्री श्याम भक्त मंडल ने कोलकाता से खाटूधाम की पदयात्रा आयोजित की है। इसी पदयात्रा के लिये संजय प्रभाकर ने बंगला भाषा में खाटू श्याम भजन लिखने का विचार बनाया। भजन लिखा गया और पदयात्रा क्रम में गाया भी गया। खाटू में पहलीबार जनवरी-09 की शुक्ल एकादशी तिथि को श्री श्याम मित्र मंडल एवं श्री श्याम सेवा मंडल में यह भजन गाया गया। बंगला भाषा में गाया गया यह भजन, श्याम भजन प्रेमियों को इतना अधिक भाया कि कोई भी इस भजन के प्रति अपनी भावना व्यक्त करने से रोक नहीं पाया। श्री संजय प्रभाकर ने बताया कि वह इस भजन को श्री श्याम सेवा मंडल के दिसम्बर 08 के वार्षिक महोत्सव में गाना चाह्ते थे, पर समयाभाव के कारण नहीं गा पाये। श्री श्याम सेवा मंडल के श्री रवि भालोटिया ने बताया कि सेवा मंडल के महोत्सव में श्री भार्गवजी के बाद यह भजन गाया जाता तो वहाँ उपस्थित बंगाली श्याम भक्तों को अच्छा लगता।श्री राजेन्द्र झँवर ने कहा कि बंगला भाषा में लिखा एवं गाया गया यह श्याम भजन अद्वितीय है। श्री विजय झुंन्झुनवाला ने भी भजन के बोलों के साथ नाच कर अन्य भक्तों के साथ भजन का भरपूर आनन्द लूटा। भजन गायक श्री संजय मित्तल ने भी बंगला भाषा में श्री संजय प्रभाकर द्वारा गाये गये भजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रभाकरजी को बंगला  भाषा का ज्ञान होना एवं उसका विशुद्ध उच्चारण ही अचम्भित करने वाला है। भजन इस साईट में दिया गया है।

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पदयात्रा का शीर्षक भजन : “चाली रे पदयात्रा-खाटूधाम की ओर”

December 22nd, 2008 admin Posted in Important News | No Comments »

धुन : संजय प्रभाकर

मच गयो- मच गयो- मच गयो- मच गयो गली-गली म शोर
सारी दुनिया म शोर (अपने नगर का नाम लें)
चाली रे पदयात्रा-चाली रे पदयात्रा, खाटूधाम की ओर।

रंग केसरिया ध्वजा सिमा क, जय श्री श्याम लिखालो,
संगी-साथी, कुटुम-कबीला सगला न ले चाल।
थारो-म्हारो कोनी, चालगो बाबा को जोर,
चाली रे पदयात्रा-चाली रे पदयात्रा, खाटूधाम की ओर।

गांव-गांव, बस्ती-बस्ती म चर्चा होसी भारी
हार्या को साथी ह, खाटू वालो लखदातारी।
श्री श्याम क हाथ सौंप न, निज जीवन की डोर,
चाली रे पदयात्रा-चाली रे पदयात्रा, खाटूधाम की ओर।

विनय शर्मा संग टोली चाली, टोली क संग बाबो,
सोणो-सोणो बनड़ो ला ग, पहन सुरंगो बागो।
श्री श्याम भक्त मण्डल बो ल-“बाबो ह सिरमोर”
चाली रे पदयात्रा-चाली रे पदयात्रा, खाटूधाम की ओर।

दो ह्जार किलोमीटर की पदयात्रा लम्बी
लाज राखगो शामधणी, बय देवगो बजरंगी।
बाबा की महिमा को “प्रभाकर”, कोई और न छोर,
चाली रे पदयात्रा-चाली रे पदयात्रा, खाटूधाम की ओर।

-संजय प्रभाकर : 0-981159403513-12-08

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श्याम संसार की अपनी वेबसाईट हो गई है प्रारम्भ

June 24th, 2008 admin Posted in Important News | No Comments »

नई दिल्ली : श्री श्याम संसार ने फान्गुन मेला २००८ में अपनी वेबसाईट Shyamsansar.com का शुभारम्भ किया था। वेबसाईट का विमोच्न श्री श्याम मंदिर कमेटी के अध्यक्ष श्री राजेन्द्र सिंह चौहान एवं मंत्री श्री प्रताप सिंह चौहान ने संयुक्त रूप से किया था। फाल्गुन के मेले की तस्वीरों को इस वेबसाईट के माध्यम से पहलीबार विश्व ने देखा। Shyamsansar.com का निर्माण कार्य चल पिछले कुछ महिनों से चल रहा था। अब यह कार्य पूर्ण हो चुका है। Shyamsansar.com को अब कहीं भी कभी भी इंटरनेट के माध्यम से देखा जा सकता है। निर्जला ग्यारस तिथि को श्याम भक्त भजन गायक एवं भक्त कवि श्रद्धेय नंदूजी ने Shyamsansar.com का अवलोकन खाटूश्यामजी में किया। उन्होंने कहा कि अब श्याम बाबा से सम्बन्धित समाचारों को Shyamsansar.com के माध्यम से घर बैठे ही तत्काल देखा व सुना जा सकेगा। वेबसाईट के सम्पादक संजय प्रभाकर ने कहा है कि देश भर के श्याम भक्त, प्रेमी एवं संस्थाएं अपने आयोजनों एवं सामाजिक क्रियाकलापों की जानकारियों को Shyamsansar.com में प्रसारित करवा सकते हैं। वेबसाईट में भजन भी सुने जा सकते हैं।

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