
खाटूश्यामजी : श्री श्याम मनुहार महोत्सव में श्री बालाजी बाल परिवार मण्डल (ग्वालियर) की मुख्य भूमिका रही है। श्री बालाजी बाल परिवार मण्डल के सभी सदस्य सेवक श्री श्याम प्रभु की भक्ति से सराबोर हैं। मण्डल के प्रत्येक सदस्य प्रमी का मानना है कि श्री श्याम मनुहार महोत्सव के प्रथम चरण में 20 जुलाई 2010 को की गई श्री श्याम मनुहार यात्रा श्री श्याम मंदिर को बड़ा बनाने के निमित्त की गई है। यही कारण है कि श्री श्याम मनुहार यात्रा में अन्य किसी जयकारे या नारों के उद्घोष के स्थान पर ‘ओम श्री श्यामदेवाय नम:’ महामंत्र के सस्वर या मानसिक जाप को आधार बनाया गया। ताकि किसी भी पदयात्री का ध्यान किसी अन्य विषय या कामना की ओर उन्मुख ना हो। पदयात्रा में किसी भी पदयात्री ने चमड़े के किसी सामान का उपयोग नहीं किया, यह यात्रा की शुद्धता का परिचायक है। मण्डल की यह कार्यशैली दर्शाती है कि श्री श्याम मनुहार महोत्सव में प्रत्यक्षत: भाग लेने वाले प्रत्येक श्याम प्रेमी ने आतंरित (मानसिक) एवं बाह्य (शारीरिक) शुद्धता को प्राथमिकता दी।
यात्राद क्रम में रींगस से ही सड़क के दोनों किनारों पर लगे नीम के पेड़ों पर तोतों के एक विशाल झुंड का उड़ना यह दर्शाता है कि यात्रा को देवी-देवताओं एवं विभिन्न रिषियों का आशीर्वाद भी मिला है। यात्रा के आरम्भ में आकाश में काले मेघों का आच्छादन धूप से बचाने हेतु बादलों की छतरी का सूचक बना, जबकि आधी यात्रा के पश्चात तोरणद्वार तक अनवरत वर्षा, धूप व गर्मी से पदयात्रियों को बचाने हेतु इंद्रदेवता द्वारा अमृतजल वर्षा का प्रतीक है। इसमें तनिक भी संशय नहीं है कि श्री श्याम प्रभु की अनुकंपा से प्रभु को धवजाएँ समर्पित करने के पश्चात की धूप खिली। कहा जाता है कि दाँता तहसील में आमतौर पर जुलाई महिने में वर्षा यदा-कदा ही होती है। जबकि इन दिनों पूरे राजस्थान में भयंकर धूप एवं लू का प्रकोप रहता है। ऐसे में क्या यह सिद्ध नहीं होता है कि बाबा के प्रति समर्पण के भाव से किये कर्म में भयंकर अग्नि वर्षा भी हो रही हो तो बाबा की कृपा से उस समय जलामृत वर्षा होने लगती है। श्री श्याम मनुहार महोत्सव के संदर्भ में एक भक्त का यह भी कहना है कि मंगलवार या रविवार को दशमी तिथि का होना, एक दुर्लभ संयोग है। इस दिन यदि वर्षा भी हो जाए तो भक्त की प्रत्येक मनोकामना अवश्य सफल होती है। यदि यह अकाटय सत्य है तो श्री श्याम मनुहार महोत्सव का उद्देश्य सर्वजन हिताय है।




