संजय प्रभाकर एक भजन गायक हैं। संगीत में दिल्ली विश्वविद्यालय से एम. ए ;मास्टर ऑफ म्यूजिक संजय प्रभाकर जब भजन गाते हैं, तो ऐसा अद्भुद भाव रस बरसता है कि श्रोता यह सोचने लगते हैं कि वह भी इनसे संगीत सीख लेते तो ऐसा सुरीला और भावयुक्त भजन गाकर प्रभु को रिझाते। संजय प्रभाकर के स्वर में टीसीरीज ने भजनों की ऐलबम बनाई हैं- ि’जय श्री बदरी केदारनाथ’, ‘बजाओ ताली श्याम नाम की’ आदि। जी म्यूजिक के लिए संजय प्रभाकर ने ‘अग्रोहा वाली महालक्ष्मी’ ऐलबम में भी अपना स्वर दिया है। इनके स्वर में अब तक ५० से भी अधिक एलबम तैयार हो चुकी हैं। संजय प्रभाकर एक भजन रचनाकार भी हैं। इन्होंने अब तक सैकड़ों भजनों की रचना की हैं। इनकी लेखनी से सृजित श्याम भजन –‘छोटी-छोटी किश्तों में तू देना छोड़ दे, बड़ी जरूरत है तू डाँलर नब्बे करोड़ दे’ मनुष्य की समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण कराने वाला चमत्कारिक भजन है। इनकी एक और भजन रचना- ‘म्हारो पीर सासरों छुट ग्यो रे, खाटूवाळा श्याम धणी से रिश्तो जुड़ग्यो रे’ संसार में रहते हुए श्याम प्रभु की भक्ति देने वाला अनुपम लोक भजन है। मारवाड़ी में लिखी धमाल का रस चखिए- ‘आ व सुपण म हकीकत म आजा रे साँवरिया! आ व सुपण म। आढ़ पीताम्बर नटवर नागर, सुपणो सच करजा, आ व सुपण म।’
संजय प्रभाकर मूलतः राजस्थानी हैं, जो खाटूधम के पास ही नीम का थाना के पास किशोरपुरा गाँव के रहने वाले हैं। संजय प्रभाकर मारवाड़ी गौढ़ ब्राह्मण हैं, प्रभाकर इनका उपनाम है। संजय प्रभाकर का बचपन झारखंड के बैजनाथधाम देवघर में बीता है। वर्त्तमान समय में आप दिल्ली में रह रहे हैं।
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