

श्री हनुमानजी की चालीसा में गोस्वामी तुलसीदासजी ने श्री हनुमानजी की महिमा का वर्णन करते हुए लिखा था-
”नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरन्तर हनुमत बीरा॥”
यह उक्ति श्री श्याम बाबा खाटू वाले की महिमा में भी शत प्रतिशत सही बैठ रही है। जो लोग श्री श्याम बाबा खाटू वाले में सम्पूर्ण और सच्ची आस्था रखते हैं उनके भी सभी रोग और सभी पीड़ाएँ नष्ट हो जाती हैं। श्री श्याम संसार ने कुछ महिने पहले खाटूश्यामजी श्री श्याम प्रभु के आशीर्वाद से दाँता ग्राम की एक वयोवृद्ध महिला श्रीमती भँवरी देवी का स्तन कैंसर ठीक हो जाने का समाचार प्रकाशित किया था। 22 जून 2010 को सम्पादक ने श्री श्याम सतसंग भवन (मुम्बई) में चल रहे नि:शुल्क चिकित्सालय में सुविख्यात होमियोपैथी चिकित्सक डॉ. के. के. कौशिक के सान्निध्य में श्रीमती भँवरी देवी एवं उनके सुपुत्रों से बात की। श्री लालचंद ठेकेदार की माताजी श्रीमती भँवरी देवी ने बताया कि उनके स्तन में गाँठ हो गई थी। वह इस गाँठ से बहुत ही व्याकुल रहती थी। बेचैनी के कारण वह सो भी नहीं पाती थी। वह अपना ईलाज कराने चोमूँ के बराला हॉस्पीटल गई। वहाँ डॉ. बूलालजी ने उनका मुआयना किया और उन्हें जयपुर के सवाई मानसिंह हॉस्पीटल में ईलाज करवाने की सलाह दी। सवाई मानसिंह हॉस्पीटल में डॉ. सोंगरा ने स्तन कैंसर की पुष्टि की और श्रीमती भँवरी देवी का एक वर्ष तक ईलाज किया। विशेष लाभ ने मिलने पर उन्होंने उन्हें कैंसर हॉस्पीटल जयपुर रैफर कर दिया। स्तन की गाँठ से श्रीमती भँवरी देवी की पीड़ा को असहनीय हाती जा रही थी। श्रीमती भँवरी देवी ने अपनी पीड़ाओं को याद करते हुए बताया कि असहनीय दर्द के कारण वह तीन महिने तक सोई नहीं, दिन रात बैठी ही रहती थी। कैंसर हॉस्पीटल जयपुर के स्तन कैंसर विशेषज्ञों ने भी अपने हाथ खड़े करते हुए कहा कि उनके पास जितनी शक्ति थी, उन्होंने सारी झौंक दी, अब हम कुछ नहीं कर सकते।
हारी-मारी दुखी और निराश श्रीमती भँवरी देवी, उनके पतिदेव श्री तुलसीरामजी अपनी धर्मपत्नी एवं उनके दो सुपुत्र श्री लालचंद ठेकेदार और श्री गौरीशंकर सिंह अपनी माँ की इस पीड़ा से अत्यंत ही दुखी थे। श्री लालचंद ठेकेदार खाटूश्यामजी में धर्मशालाओं के निर्माण की ठेकेदारी करते हैं। श्री श्याम सतसंग भवन (मुम्बई) में उनका आना-जाना था। एक दिन उनहोंने श्री श्याम सतसंग भवन के मुनीम श्री ओमजी शर्मा को अपना दुखड़ा सुनाया। श्री ओमजी शर्मा ने श्री श्याम श्याम प्रभु का धयान रखते हुए श्री लालचंद ठेकेदार को श्री श्याम सतसंग भवन में प्रति शुक्ल एकादशी तिथि को चलने वाले नि:शुल्क चिकित्सालय के बारे में बताते हुए कहा कि यहाँ श्री श्याम बाबा की कृपा से हर प्रकार की गम्भीर से गम्भीर रोगों का नि:शुल्क ईलाज किया जाता है।
2010 के माघ महिने की शुक्ल एकादशी अर्थात 26 जनवरी को श्री लालचंद ठेकेदार अपनी माताजी को लेकर खाटूश्यामजी आए। श्री श्याम प्रभु के दर्शन कर वह डॉ. के. के. कौशिक से मिले। प्रख्यात होमियापैथी चिकित्सक डॉ. के. के. कौशिक ने श्री श्याम बाबा का नाम लेकर श्रीमती भँवरी देवी के स्तन कैंसर की गाँठो को समाप्त करने हेतु नि:शुल्क दवा दी। श्रीमती भँवरी देवी फाल्गुन की ग्यारस को भी खाटूधाम आई थीं, गाँठे हल्की पाई गईं। अब वह दिन रात बैठकर नहीं सो कर गुजारने लगी। गाँठों की पीड़ा को श्री श्याम प्रभु अनवरत हर हरने लगे। 22 जून 2010 को सम्पादक श्री संजय प्रभाकर ने पाया कि श्रीमती भँवरी देवी का वह कैंसर जिसके लिये जयपुर के कैसर हॉस्पीटल ने भी अपने हाथ खड़े कर दिये थे, समाप्त प्राय हो चुका है। श्रीमती भँवरी देवी अब प्रत्येक शुक्ल ग्यारस को खाटूश्याम बाबा के दर्शन करती है, उन्हें कोटि-कोटि धन्यवाद देते हुए यही कहती है- ”हे श्याम बाबा! श्री श्याम सतसंग भवन (मुम्बई) में असाध्य रोगों का ईलाज तेरी कृपा से डॉ. कौशिक एवं उनकी पूरी टीम इसी प्रकार से करती रहे, जैसे मेरे रोग को आपने दूर किया है।“
वर्तमान समय में श्री श्याम सतसंग भवन (मुम्बई) में डॉ. के. के. कौशिक (दिल्ली) के अतिरिक्त डॉ. चन्द्रमणी शर्मा (साहिबाबाद, गाजियाबाद) एवं सहयोगी श्री यशदीप शर्मा, श्री अंकुश जैन एवं श्री वैभव शर्मा प्रत्येक महिने की शुक्ल कएादशी को श्याम भक्तों की सेवा में ही श्री श्याम प्रभु की अराधना और भक्ति का पुण्य प्राप्त कर रहे हैं।

